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कोयला खदान के लिए पेड़ कटाई की अनुमति वापस ले सरकार
12-Jun-2026 5:36 PM
कोयला खदान के लिए पेड़ कटाई की अनुमति वापस  ले सरकार

 पेसा कानून का हो क्रियान्वयन-कांग्रेस

'छत्तीसगढ़' संवाददाता
रायपुर, 12 जून।
प्रदेश कांग्रेस के आदिवासी नेताओं की शुक्रवार को बैठक में जल, जंगल, जमीन, और खनिज संसाधनों को बचाने की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में पारित प्रस्ताव में हसदेव अरण्य, केते एक्सटेंशन, और अन्य परियोजनाओं के लिए पेड़ कटाई की अनुमति, और डायवर्सन को निरस्त करने की मांग की गई है। यही नहीं, वन अधिकार पट्टा, और नक्सल हिंसा-फर्जी एनकाउंटर में पीडि़त परिवारों को मुआवजा देने की मांग की गई है। 
राजीव भवन में हुई बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव और पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू सहित बड़ी संख्या में विधायक, पूर्व विधायक और  पदाधिकारी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

बैठक में 12 सूत्रीय प्रस्ताव प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रस्तुत किया। सभी ने हाथ उठाकर पारित किया।इनमें  हसदेव अरण्य सहित अलग-अलग क्षेत्रों में कोयला खनन और वन भूमि डायवर्सन की अनुमति रद्द करने, अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 32 प्रतिशत आरक्षण लागू करने तथा लंबित आरक्षण विधेयक की अधिसूचना जारी करने की मांग की गई। प्रस्ताव में वन अधिकार अधिनियम के तहत पात्र हितग्राहियों को वनाधिकार पट्टे देने और पेसा कानून का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की भी मांग की गई।

प्रस्ताव में नक्सल हिंसा और पुलिस कार्रवाई से प्रभावित आदिवासियों के पुनर्वास, मुआवजे और पलायन कर चुके लोगों की वापसी सुनिश्चित करने की बात कही गई। साथ ही नक्सली सहयोगी होने के आरोप में जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों की रिहाई तथा उनके विरुद्ध जारी वारंट निरस्त करने की मांग भी उठाई गई।
कांग्रेस नेताओं ने संविधान की पांचवीं अनुसूची, पेसा कानून और वन अधिकार अधिनियम के तहत आदिवासियों के पारंपरिक एवं संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। प्रस्ताव में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के दायरे से आदिवासी समाज को बाहर रखने, स्थानीय रोजगार और सरकारी भर्तियों में आदिवासियों को प्राथमिकता देने तथा बस्तर और सरगुजा संभाग में बंद स्कूलों को फिर खोलकर विशेष भर्ती अभियान चलाने की मांग भी शामिल है।
बैठक में पारित प्रस्ताव में आदिवासी समुदाय को 'वनवासी' कहे जाने का विरोध करते हुए इसे उनकी मूल पहचान के खिलाफ बताया गया। साथ ही वर्ष 2026-27 की जनगणना में आदिवासियों की अलग पहचान दर्ज करने के लिए पृथक कॉलम निर्धारित करने की मांग भी की गई।
बैठक में उपनेता प्रतिपक्ष लखेश्वर बघेल, पूर्व मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, अनिला भेडिय़ा, आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जनक ध्रुव भी मौजूद थे।


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