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58 लाख रुपये से अधिक के लंबित भुगतान पर कलेक्टर को निर्णय लेने के निर्देश
12-Jun-2026 11:57 AM
58 लाख रुपये से अधिक के लंबित भुगतान पर कलेक्टर को निर्णय लेने के निर्देश

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 12 जून। ग्राम पंचायत क्षेत्र में कराए गए निर्माण कार्यों का 58 लाख रुपये से अधिक का भुगतान नहीं मिलने से परेशान ठेकेदार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से राहत मिली है। न्यायालय ने बिलासपुर कलेक्टर को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता के लंबित आवेदन पर नियमानुसार विचार कर उचित निर्णय लिया जाए।

हालांकि, हाईकोर्ट ने भुगतान के दावे की वैधता पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया और स्पष्ट किया कि इस विवाद का समाधान प्रशासनिक स्तर पर किया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता चंद्रप्रकाश सोनवानी ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में बताया था कि उन्होंने ग्राम पंचायत क्षेत्र में विभिन्न निर्माण कार्य पूरे किए थे। इन कार्यों के एवज में 58 लाख 35 हजार 629 रुपये का भुगतान अब तक लंबित है। उन्होंने देरी से भुगतान पर ब्याज और क्षतिपूर्ति की मांग भी की थी।

याचिका के अनुसार, ठेकेदार ने अपने बकाया भुगतान के लिए जनपद पंचायत मस्तूरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को आवेदन दिया था। इसके बाद सीईओ ने मामले को आवश्यक कार्रवाई के लिए बिलासपुर कलेक्टर के पास भेज दिया था। बावजूद इसके, अब तक भुगतान को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति ए.के. प्रसाद की एकलपीठ में हुई। राज्य शासन की ओर से उपस्थित पैनल वकील ने भी इस बात पर आपत्ति नहीं जताई कि संबंधित प्राधिकारी को आवेदन पर निर्णय लेने का निर्देश दिया जाए।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि विवाद का मुख्य बिंदु फिलहाल संबंधित प्रशासनिक प्राधिकारी के समक्ष लंबित आवेदन है। इसलिए उसी स्तर पर नियमों के अनुसार निर्णय लिया जाना उचित होगा। अदालत ने कलेक्टर को मामले पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

फर्जी पुलिसकर्मी बनकर युवकों को बंधक बनाने के मामले में एफआईआर रद्द करने से हाईकोर्ट का इनकार

बिलासपुर, 12 जून। सकरी थाना क्षेत्र में खुद को पुलिसकर्मी बताकर दो युवकों को बंधक बनाने, धमकाने और धन उगाही की कोशिश करने के आरोप से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने की मांग खारिज कर दी है। न्यायालय ने कहा कि मामला प्रथम दृष्टया गंभीर और संज्ञेय अपराध का प्रतीत होता है, इसलिए जांच के शुरुआती चरण में हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा।

यह आदेश सकरी स्थित आसमा सिटी निवासी सतीश मिश्रा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद दिया गया।

जानकारी के अनुसार, सकरी क्षेत्र की निवासी साक्षी जोशी ने 28 अप्रैल 2026 को लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि 20 से 24 फरवरी 2026 के बीच सतीश मिश्रा ने उनके पुत्र मयंक जोशी और उसके मित्र उज्ज्वल राणा को कई बार अपने घर बुलाया।

आरोप है कि सतीश मिश्रा ने कुछ अज्ञात व्यक्तियों को पुलिस अधिकारी बताकर दोनों युवकों को एक घर में बंधक बनाकर रखा, उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी और पुलिस लिखे वाहनों में बैठाकर अज्ञात स्थान पर ले गए। वहां कथित रूप से दोनों युवकों से बड़ी रकम वसूलने का प्रयास किया गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

याचिका में सतीश मिश्रा ने दावा किया कि उनके घर से 75 से 80 लाख रुपये के आभूषण चोरी हुए थे और मयंक जोशी तथा उज्ज्वल राणा इस चोरी में शामिल थे। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उन्होंने सकरी थाना, पुलिस अधीक्षक और आईजी को शिकायतें दी थीं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। बाद में उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी, जिसके प्रतिशोध में यह एफआईआर दर्ज कराई गई।

याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि उनकी पत्नी स्तन कैंसर से पीड़ित हैं और एम्स रायपुर में उपचाररत हैं। इसी आधार पर राहत देने की मांग की गई थी।

सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी पहले नियमित जमानत के लिए भी आवेदन कर चुका है। इस मामले में हाईकोर्ट ने 12 मई 2026 को बिलासपुर पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत शपथपत्र प्रस्तुत करने और जांच में जुटाए गए साक्ष्यों का विवरण देने का निर्देश दिया था।

याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि जांच अभी जारी है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर एफआईआर को इस स्तर पर निरस्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के दावों की सत्यता का परीक्षण पुलिस जांच और उसके बाद निचली अदालत में होने वाली सुनवाई के दौरान किया जाएगा।


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