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बिलासपुर रेल कोचिंग डिपो का अनोखा प्रयोग
07-Jun-2026 1:40 PM
बिलासपुर रेल कोचिंग डिपो का अनोखा प्रयोग

 ‘अमृत लिक्विड ट्री’ से होगी हवा की सफाई

'छत्तीसगढ़' संवाददाता

बिलासपुर, 7 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के कोचिंग डिपो, बिलासपुर ने पर्यावरण संरक्षण और वायु प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक अभिनव पहल प्रस्तुत की। डिपो द्वारा विकसित ‘अमृत’ (एडवांस्ड माइक्रोएल्गी रिएक्टर फॉर इंटेलिजेंट ट्रीटमेंट) नामक ‘लिक्विड ट्री’ मॉडल का प्रदर्शन दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक तरुण प्रकाश के समक्ष किया गया।

यह अत्याधुनिक मॉडल माइक्रोएल्गी तकनीक पर आधारित है। इसकी विशेषता यह है कि यह प्रदूषित हवा में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर प्रकाश संश्लेषण की प्राकृतिक प्रक्रिया के माध्यम से ऑक्सीजन का उत्सर्जन करता है। इससे आसपास की वायु गुणवत्ता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

इस मॉडल में माइक्रोएल्गी युक्त पानी, एयर सेंसर, इंड्यूस्ड फैन और स्पार्जर जैसी तकनीकों का उपयोग किया गया है। फैन के माध्यम से प्रदूषित हवा को सिस्टम के भीतर पहुंचाया जाता है, जहां मौजूद माइक्रोएल्गी कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रहण करती है और बदले में ऑक्सीजन छोड़ती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जहां बड़े पैमाने पर पेड़ लगाना संभव नहीं है, वहां इस तरह की तकनीक पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी विकल्प बन सकती है।

मंडल यांत्रिक अभियंता (कोचिंग) पीयूष प्रताप सिंह ने बताया कि यह प्रणाली विशेष रूप से उन शहरी क्षेत्रों के लिए उपयोगी हो सकती है जहां जगह की कमी है। रेलवे स्टेशन, बस टर्मिनल, व्यस्त बाजार, सार्वजनिक परिसर और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों पर इसका उपयोग वायु प्रदूषण कम करने में मददगार साबित  सकता है।

उन्होंने बताया कि भविष्य में इस मॉडल को सौर ऊर्जा आधारित प्रणाली के रूप में विकसित करने की भी योजना है, जिससे यह और अधिक पर्यावरण अनुकूल तथा ऊर्जा दक्ष बन सकेगा।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक तरुण प्रकाश ने इस नवाचार की प्रशंसा करते हुए इसे हरित रेलवे और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रयोग भविष्य में रेलवे परिसरों को अधिक स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाने में सहायक हो सकते हैं।

इस अभिनव मॉडल की परिकल्पना, विकास और सफल क्रियान्वयन में वरिष्ठ कोचिंग डिपो अधिकारी बलराम साहू, मंडल यांत्रिक अभियंता (कोचिंग) पीयूष प्रताप सिंह, यार्ड प्रभारी सोमनाथ साहू तथा उनकी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।  

 


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