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जिंदा आदिवासियों को कागजों में मृत बताकर हड़प ली 19 एकड़ जमीन, पटवारी निलंबित
07-Jun-2026 1:47 PM
जिंदा आदिवासियों को कागजों में मृत बताकर हड़प ली 19 एकड़ जमीन, पटवारी निलंबित

'छत्तीसगढ़' संवाददाता

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, 7 जून। मरवाही क्षेत्र में आदिवासी परिवारों की पुश्तैनी जमीन हड़पने के लिए उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिए जाने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाए जाने पर मरवाही एसडीएम ने हल्का नंबर-24 करगीकला के पटवारी रविंद्र कश्यप को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं कलेक्टर के निर्देश पर तत्कालीन सरपंच और ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

मामला मरवाही तहसील के सेमरदर्री गांव के आदिवासी परिवारों से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार सावन सिंह, मान सिंह, रामखिलावन और दिनेश सिंह गोंड की मगुरड़ा गांव में कुल 19.28 एकड़ पुश्तैनी जमीन है। आरोप है कि इस बहुमूल्य आदिवासी भूमि पर कब्जा करने के लिए भूमाफियाओं ने राजस्व और पंचायत तंत्र के कुछ लोगों के साथ मिलकर सुनियोजित साजिश रची।

जांच में सामने आया कि 26 नवंबर 2024 को ग्राम पंचायत मगुरड़ा के एक प्रस्ताव के आधार पर संबंधित भू-स्वामियों को मृत मान लिया गया। हैरानी की बात यह रही कि इसके लिए किसी प्रकार के मृत्यु प्रमाण पत्र या अन्य वैध दस्तावेजों का सत्यापन नहीं किया गया।

इसके बाद फौती नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कर अंगद सिंह, हनुमान सिंह, ज्ञान सिंह और अन्य लोगों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कर दिए गए। बाद में 14 मई 2025 को विवादित जमीन की रजिस्ट्री भी कर दी गई और राजस्व अभिलेखों में नामांतरण की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।

बताया जा रहा है कि आरोपित शेष जमीन को भी बेचने की तैयारी में थे, लेकिन पीड़ित परिवारों को जब पूरे मामले की जानकारी मिली तो उन्होंने कलेक्टर के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत के बाद प्रशासन ने प्रारंभिक जांच कराई। जांच रिपोर्ट में पटवारी रविंद्र कश्यप की भूमिका प्रथम दृष्टया संदिग्ध और दोषपूर्ण पाई गई। इसके आधार पर एसडीएम ने उन्हें निलंबित कर दिया। निलंबन आदेश में उल्लेख किया गया है कि उनका आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों के विपरीत तथा शासकीय दायित्वों के प्रति लापरवाहीपूर्ण पाया गया।

निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय मरवाही तहसील कार्यालय निर्धारित किया गया है।

एसडीएम की जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि ग्राम सभा का प्रस्ताव बिना किसी दस्तावेजी जांच और सत्यापन के पारित किया गया था। इसे गंभीर वित्तीय और प्रक्रियागत अनियमितता मानते हुए कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने जिला पंचायत सीईओ मुकेश रावटे को पत्र भेजकर ग्राम पंचायत सचिव ज्योति गुप्ता और तत्कालीन सरपंच सुखलाल पोर्ते के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।


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