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हाउसिंग बोर्ड के भवन को निजी बताकर तोड़ने का आदेश दे दिया सिटी मजिस्ट्रेट ने
07-Jun-2026 12:23 PM
हाउसिंग बोर्ड के भवन को निजी बताकर तोड़ने का आदेश दे दिया सिटी मजिस्ट्रेट ने

कमिश्नर ने जिम्मेदार लोगों से 80 लाख रुपये वसूल करने का दिया निर्देश

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 7 जून। बिलासपुर के नेहरू नगर स्थित हाउसिंग बोर्ड की बहुमूल्य जमीन पर बने सामुदायिक भवन को ढहाए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के आयुक्त अवनीश शरण ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के आदेश देते हुए कहा है कि इस घटना से बोर्ड को लगभग 80 लाख रुपये का नुकसान हुआ है, जिसकी वसूली दोषियों से की जानी चाहिए।

आयुक्त ने 5 जून को बिलासपुर कलेक्टर को पत्र भेजकर 15 बिंदुओं पर जांच कराने का अनुरोध किया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि लगभग 40 लाख रुपये मूल्य का सामुदायिक भवन नियमों की अनदेखी कर ध्वस्त कर दिया गया। इसके अलावा भूमि से जुड़े पूरे विवाद और प्रशासनिक कार्रवाई की भी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

हाउसिंग बोर्ड के अनुसार संबंधित भूमि का एक हिस्सा वर्ष 1966 में सहकारी समिति से खरीदा गया था, जबकि शेष भूमि शासन से प्राप्त हुई थी। इसके बावजूद भवन को निजी संपत्ति मानकर कार्रवाई किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं।

मामले में स्थानीय राजस्व अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। आयुक्त ने अपने पत्र में कहा है कि सिटी मजिस्ट्रेट ने मूल भूमि स्वामी छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड को नोटिस दिए बिना तथा उसका पक्ष सुने बिना एकतरफा आदेश जारी कर दिया। इसी आदेश के आधार पर 2 जून को नेहरू नगर स्थित लगभग 60 वर्ष पुराने सामुदायिक भवन को तोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी गई।

बताया गया है कि कुदुदंड निवासी मोहम्मद अली ने भवन को अपनी निजी संपत्ति बताते हुए इसे जर्जर घोषित कर ध्वस्तीकरण की मांग सिटी मजिस्ट्रेट रजनी भगत से की थी। आरोप है कि राजस्व विभाग की रिपोर्ट में भवन की स्थिति का उल्लेख तो किया गया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि भवन सरकारी है या निजी। स्थानीय लोगों के विरोध के बाद मामला उजागर हुआ और प्रशासन हरकत में आया।

हाउसिंग बोर्ड ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए भ्रामक प्रतिवेदन तैयार किया गया। आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों के आचरण की निष्पक्ष जांच, विभागीय कार्रवाई और कानूनी कदम उठाने की मांग की है। साथ ही ऐसे दस्तावेज तैयार करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की भी अनुशंसा की गई है, जिनमें हाउसिंग बोर्ड और एक आवास निर्माण समिति को समान बताने का प्रयास किया गया।

उधर, हाउसिंग बोर्ड की शिकायत पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी मोहम्मद अली के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। मामले में आगे की जांच जारी है।

विवाद बढ़ने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट रजनी भगत ने 2 जून को अपने पूर्व आदेश पर स्थगन आदेश जारी कर दिया था।  


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