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अध्यक्ष ने माना रातभर नाबालिग को थाना में रखना क्रूरता का मामला
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 3 जून। सोमनी थाना में नाबालिग प्रताडऩा मामला अब बाल संरक्षण आयोग तक पहुंच गया है। आयोग के इस मामले में दखल देने के बाद पुलिस अफसरों पर आपराधिक मामला दर्ज करने की संभावना बढ़ गई है।
वहीं एसपी से अध्यक्ष ने सीधे मामले से जुड़ा प्रतिवेदन आयोग को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग प्रथम दृष्टया इस मामले में नाबालिग के साथ हुए दुव्र्यवहार और अमानवीय हरकत को क्रूरता मान रहा है। आयोग के अध्यक्ष का मानना है कि यह प्रथम दृष्टया अपराध की श्रेणी में आता है। आयोग के गंभीर होने से इस मामले में अब जांच में तेजी आने की संभावना है। पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा से अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने बातचीत कर वस्तुस्थिति की जानकारी ली है। बाल संरक्षण आयोग ने थाना में रखने को क्रूरता मानकर धारा-75 के तहत भी दोषियों पर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक सोमनी नाबालिग प्रकरण का मामला सामने आने के बाद बाल संरक्षण आयोग ने सीधे तौर पर एसपी से बातचीत की। एसपी से बातचीत में अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने धारा 75 को जोडऩे का निर्देश दिया। अध्यक्ष ने एसपी से प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा है। आयोग द्वारा जिला स्तर के अफसरों और पुलिस अधिकारियों की एक संयुक्त टीम को जांच के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि एसपी ने थाना प्रभारी अरूण नामदेव और महिला आरक्षक को निलंबित कर दिया है। जबकि परिजनों की ओर से दोषियों के खिलाफ बर्खास्तगी को लेकर आवाज उठाई जा रही है।
उधर कांग्रेस ने इस मुद्दे को राजनीतिक तौर पर सुर्खियों में ला दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि जिस तरह से नाबालिग और उसके परिजनों को थाना में बेईज्जत किया गया है, उसका एक निलंबन की कार्रवाई मात्र से पटाक्षेप नहीं होगा। कांग्रेस ने एफआईआर दर्ज करने के साथ-साथ पुलिसकर्मियों को बर्खास्त करने की मांग की है। कांग्रेस शहर अध्यक्ष जितेन्द्र मुदलियार इस मामले में बेहद आक्रामक है। कांग्रेसियों ने एसपी से मिलकर औपचारिक तौर पर निलंबन की कार्रवाई को अस्वीकार बताया।
इस बीच बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने ‘छत्तीसगढ़’ से पूरे मामले में चर्चा करते कहा कि पुलिस कर्मियों के व्यवहार और कार्रवाई से जुड़े प्रतिवेदन को प्रस्तुत करने निर्देश दिया गया है। उन्होंने बताया कि एसपी अंकिता शर्मा से इस संदर्भ में उनकी लगातार बातचीत हो रही है। उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि नाबालिग को थाना में रखना एक बड़ा अपराध और क्रूरता का परिचायक है। धारा 75 के तहत भी क्रूरता के आरोप लगने पर जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। बहरहाल यह मामला अब बाल संरक्षण आयोग तक पहुंच गया है। राजनांदगांव पुलिस को लगातार इस घटनाक्रम को लेकर लोगों के सवाल का जवाब देना पड़ रहा है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को एक बड़ा सियासी मुद्दा बना दिया है।


