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बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार ने राज्य के शैक्षणिक संस्थानों के कार्यक्रम में वंदे मातरम् के गायन को अनिवार्य कर दिया है. बिहार सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार राज्य में स्कूल-कॉलेज व मदरसा समेत सभी शैक्षणिक संस्थानों में दिन की शुरुआत वंदे मातरम के सामूहिक गायन से की जाएगी. इसके बाद राष्ट्रीय गीत जन-गण-मन का सामूहिक गायन होगा. इसके बाद क्लास की शुरुआत होगी. वहीं, राज्य सरकार के सभी कार्यक्रमों की शुरुआत इन्हीं दोनों गीतों के गायन से होगी और समापन बिहार गीत ‘मेरे भारत के कंठहार' से किया जाएगा.
प्रदेश सरकार द्वारा जारी आदेश में राष्ट्रीय गीत को लेकर केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है. इसके अनुसार वंदे मातरम का सभी छह छंदों ( स्टेंजा) को गाना अनिवार्य होगा. इस आदेश को सेक्युलरिज्म के खिलाफ बताते हुए राज्य के सीमांचल वाले इलाके में सक्रिय असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने इसका विरोध किया है. पार्टी का कहना है कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का सम्मान हर नागरिक करता है, लेकिन जबरन थोपना व्यक्तिगत आजादी के खिलाफ है. वैसे पहले से भी मुसलमानों को वंदे मातरम् से आपत्ति रही है. खासकर, मुस्लिम लीग इसका पुरजोर विरोध करती रही है. वंदे मातरम् की रचना संस्कृत और बांग्ला में की गई थी. जिसमें कवि ने मातृभूमि को देवी मां के रूप में चित्रित किया है.
पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सात नवंबर, 2025 को राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी किया था. इसके बाद इस साल फरवरी महीने में इस गीत को लेकर केंद्र सरकार ने एक दिशा-निर्देश जारी किया. जिसमें कहा गया है कि स्कूलों में दिन की शुरुआत के दौरान वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया जाएगा, जब राष्ट्रीय ध्वज को परेड में लाया जाएगा तब इसे गाना या बजाना होगा. साथ ही भारत रत्न, पद्म पुरस्कार जैसे सम्मान समारोहों में और दूरदर्शन, आकाशवाणी जैसे सरकारी मीडिया प्लेटफॉर्म पर राष्ट्रपति के संबोधन से पहले और बाद में वंदे मातरम् बजाया जाएगा. जारी गाइडलाइन में उन कई अन्य अवसरों की भी चर्चा है, जब वंदे मातरम् गाना या बजाना होगा.
विरोधी कह रहे हिन्दू राष्ट्र बनाने की साजिश
एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने किशनगंज में मीडिया से कहा कि वंदे मातरम का गायन हमारी धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है. हमलोग मूर्ति नहीं पूजते, सिर्फ एक ही अल्लाह की इबादत करते हैं. सरकार हमें दूसरे की वंदना के लिए मजबूर कर रही. इससे हमें काफी परेशानी है. यह हमारी आस्था पर चोट है. हम इस्लाम धर्म का पालन करने वाले लोग हैं और किसी भी हालत में उस पर आघात नहीं पहुंचने देंगे. हम लोग किसी भी हाल में वंदे मातरम् गाने वाले नहीं हैं.
बिहार सरकार इस आदेश पर रोक लगाए. सरकार अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए ऐसे फरमान जारी कर हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच वैमनस्य बढ़ाना चाहती है. इस फरमान को वापस लेने के लिए हमारी पार्टी के सभी पांच विधायक सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेंगे. अगर यह देश हिंदू राष्ट्र बन ही गया है तो इसकी घोषणा कर देनी चाहिए. फिर तो जो चाहे सरकार करे.
ईमान ने कहा, दरअसल यह सब षड्यंत्र हिन्दू राष्ट्र घोषित करने के लिए ही किया जा रहा है. एआइएमआइएम के ही और विधायक सरवर आलम ने भी इसे लेकर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से इस आदेश का विरोध किया जाएगा. राज्य सरकार विवाद पैदा करने की बजाय समाज में भाईचारा और विकास का माहौल बनाए.
कानून में संशोधन, अब दंडनीय अपराध
केंद्र सरकार द्वारा एक संशोधन को मंजूरी के बाद अब वंदे मातरम् का अपमान दंडनीय अपराध माना जाएगा. दरअसल, राष्ट्रीय गौरव के अपमान की रोकथाम अधिनियम,1971 के सेक्शन-3 के अनुसार राष्ट्रगान के जन-गण-मन के अपमान या इसमें रुकावट पैदा करने पर तीन साल की कैद या जुर्माने का प्रावधान है. अधिवक्ता राजेश के. सिंह कहते हैं, "जहां तक मुझे ज्ञात है कि इसी अधिनियम में बीते पांच मई को संशोधन को मंजूरी दी गई है. जिसके बाद राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् भी इस अधिनियम में शामिल कर लिया गया है. इस प्रकार से इस गीत को भी राष्ट्रगान के समकक्ष का दर्जा मिल जाएगा. जाहिर है, तब वंदे मातरम् के अपमान या इसमें रुकावट पैदा करने पर तीन साल की सजा मिल सकती है या जुर्माना देना पड़ सकता है."
इतिहास के रिटायर्ड प्राध्यापक एस.के. पांडा कहते हैं, "मुस्लिमों को परेशानी विशेष रूप पूर्ण गीत के उन कुछ छंदों से है, जिसमें देवी-देवताओं की बात कही गई है. इसमें भारत माता की तुलना हिंदुओं के देवी-देवताओं जैसे दुर्गा और लक्ष्मी से की गई है. फिर वंदे मातरम् का शाब्दिक अर्थ भी है, मां मैं तेरी वंदना करता हूं. वंदना का आशय पूजा से है."
जबकि, इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार वतन से प्रेम करना और उसका सम्मान करना तो ईमान का हिस्सा है, लेकिन उसे माता मान कर उसकी वंदना करने की अनुमति नहीं है इसलिए मुस्लिम समुदाय इसे अपनी धार्मिक आस्था के खिलाफ मान रहा है. पांडा कहते हैं, "जरूरी नहीं है कि मुसलमानों को भी वंदे मातरम् गाना ही पड़ेगा. केरल राज्य से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के अनुसार किसी भी व्यक्ति को अगर उसकी धार्मिक आस्था राष्ट्रगान गाने की इजाजत नहीं देता है तो उसे इसके लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है." अगर वह इसे नहीं गाता है और सम्मान में शांतिपूर्वक खड़ा रहता है तो इसे किसी हाल में अपराध नहीं माना जाएगा. तो फिर दंड की बात कहां से आती है. अगर वंदे मातरम् के गायन के वक्त कोई शांतिपूर्वक तरीके से खड़ा रहता है तो इसे अपमान या अनादर नहीं माना जाएगा.
बिहार के ही एक पत्रकार अक्षय बाजपेयी कहते हैं, "बिहार में 17 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है. जिस पर एआईएमआईएम की नजर है. उसकी पैठ सीमांचल के इलाके में बढ़ी है, विधानसभा चुनाव में सीटें भी मिली हैं. आरजेडी और कांग्रेस हिन्दू वोट बिदकने के डर से बिहार सरकार के ताजा आदेश का खुलकर विरोध करने की स्थिति में नहीं है. इस परिस्थिति में एआईएमआईएम यह साबित करने की जुगत में है कि वही मुस्लिमों की रहनुमा है."


