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-शर्लिन मोलन और जेसिका मर्फी
भारतीय अरबपति गौतम अदानी और उनके भतीजे सागर अदानी यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन की ओर से दायर सिविल फ्रॉड मुक़दमे को निपटाने के लिए संयुक्त रूप से 1.80 करोड़ डॉलर का जुर्माना देने पर सहमत हो गए हैं.
2024 में इस रेगुलेटर ने आरोप लगाया था कि अदानी परिवार ने हाई प्रोफ़ाइल रिन्युबल एनर्जी परियोजनाओं के लिए भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने और बांड जारी करके पूंजी जुटाने की कोशिश करते समय रिश्वत विरोधी प्रैक्टिस के बारे में अमेरिकी निवेशकों को गुमराह किया था.
प्रस्तावित सौदा अदालत की मंजूरी के अधीन है. लेकिन शेयर मार्केट में इस घटनाक्रम पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखी. इस वजह से शुक्रवार को अदानी समूह की कंपनियों के शेयरों में बढ़ोतरी दर्ज की गई.
अदानी समूह भारत के सबसे बड़े व्यापारिक समूहों में से एक है, जिसकी ऊर्जा और हवाई अड्डों सहित कई क्षेत्रों में दिलचस्पी है.
प्रस्तावित समझौते में आरोपों की कोई स्वीकारोक्ति या खंडन शामिल नहीं है.
लेकिन इसमें कहा गया है कि अदानी परिवार निवेशक के साथ धोखाधड़ी, सिक्योरिटीज धोखाधड़ी और बाजार में हेरफेर से जुड़े प्रमुख अमेरिकी धोखाधड़ी-विरोधी कानूनों का भविष्य में उल्लंघन नहीं करेगा.
2024 के मुकदमे में सिक्योरिटीज रेगुलेटर ( नियामक) ने अदानी परिवार पर रिश्वत-विरोधी कानूनों के अनुपालन के बारे में निवेशकों को कथित तौर पर गुमराह करने का आरोप लगाया था.
रेगुलेटर के आरोपों के मुताबिक़ अदानी परिवार ने इस तरह से अमेरिकी निवेशकों से लगभग 17.5 करोड़ डॉलर समेत 75 करोड़ डॉलर जुटाया था.
हालांकि अदानी समूह ने इन आरोपों को 'बेबुनियाद' करार दिया है.
फ़ोर्ब्स के मुताबिक़, 63 वर्षीय अदानी की कुल संपत्ति 82 अरब डॉलर है. वो दुनिया के सबसे अमीर लोगों से एक हैं.
इसके अलावा, न्यूयॉर्क टाइम्स, रॉयटर्स और ब्लूमबर्ग ने गुरुवार को बताया कि अमेरिकी न्याय विभाग गौतम अदानी के ख़िलाफ़ आपराधिक धोखाधड़ी के आरोप हटाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
'न्यूयॉर्क टाइम्स' ने बताया कि न्याय विभाग का यह उलटफेर तब हुआ जब अदानी ने रॉबर्ट जे गिफ्रा जूनियर के नेतृत्व में वकीलों की एक नई टीम को नियुक्त किया. ये अमेरिका की सबसे ताक़तवर लॉ फर्मों में से एक के प्रमुख और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निजी कानूनी सलाहकारों में से एक है.
गिफ्रा उन वकीलों में से एक थीं जिन्हें ट्रंप ने 'हश मनी' पेमेंट में अपने ख़िलाफ़ मुक़दमा लड़ने के लिए हायर किया था.
टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, गिफ्रा ने पिछले महीने न्याय विभाग के अधिकारियों से मुलाकात की थी ताकि मामले के बारे में अपनी चिंताओं को जाहिर कर सकें
उन्होंने यह भी कहा कि अगर अभियोजक अदानी के ख़िलाफ़ आरोपों को ख़त्म कर देते हैं तो वो अमेरिका में 10 अरब डॉलर का निवेश करेंगे और 15,000 नौकरियां पैदा करेंगे.
यह वही वादा था जो अदानी ने 2024 का राष्ट्रपति चुनाव जीतने के तुरंत बाद ट्रंप से किया था.
सूत्रों ने कथित तौर पर टाइम्स को बताया कि यह मामला खारिज किया जाना ट्रंप प्रशासन के दौरान विदेशी रिश्वतखोरी के मामलों में कार्रवाई से पीछे हटने की व्यापक नीति का हिस्सा है.
बीबीसी ने इस पर प्रतिक्रिया के लिए अमेरिकी न्याय विभाग और अदानी ग्रुप से संपर्क किया है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित (bbc.com/hindi)


