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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ़ विजय ने कहा है कि मेडिकल कोर्स में नीट आधारित दाख़िले को ख़त्म कर देना चाहिए और राज्यों को 12वीं क्लास के मार्क्स के आधार पर स्टूडेंट को दाख़िले की इजाज़त देनी चाहिए.
मुख्यमंत्री विजय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट-यूजी 2026) का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने 3 मई 2026 को 5,432 केंद्रों पर किया था और सिर्फ़ तमिलनाडु में ही यह परीक्षा 31 शहरों में आयोजित की गई.
“इस परीक्षा में 22,05,035 उम्मीदवार शामिल हुए, जिनमें लगभग 1.4 लाख उम्मीदवार तमिलनाडु से थे. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने अब भारत सरकार की मंज़ूरी के साथ इस परीक्षा को रद्द कर दिया है, क्योंकि कानूनी प्रवर्तन एजेंसियां प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों की जांच कर रही हैं.”
“इस मामले की जांच को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया है. देशभर में इस परीक्षा को रद्द किए जाने से लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों की उम्मीदें टूट गई हैं. यह पहली बार नहीं है जब नीट की शुद्धता प्रभावित हुई है.”
“2024 में प्रश्नपत्र लीक हुआ था और छह राज्यों में एफ़आईआर दर्ज की गई थीं, जिन्हें बाद में सीबीआई को सौंप दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक़, केंद्र सरकार ने इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति गठित की थी, जिसने सुधारों के लिए 95 व्यापक सिफारिशें प्रस्तुत की थीं.”
“इसके बावजूद, दो वर्षों के भीतर फिर एक पेपर लीक हुआ और परीक्षा रद्द करनी पड़ी. यह राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में खामियों और संरचनात्मक कमियों का निर्णायक प्रमाण है.”
सीएम विजय के बयान में कहा गया है कि तमिलनाडु की सरकारें शुरू से ही लगातार और सर्वसम्मति से नीट का विरोध करती रही हैं.
“नीट लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों, सरकारी स्कूलों, तमिल माध्यम की पृष्ठभूमि और सामाजिक-आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों के छात्रों को गंभीर नुक़सान हुआ है.”
“तमिलनाडु सरकार नीट को ख़त्म करने और राज्यों को एमबीबीएस, बीडीएस और आयुष पाठ्यक्रमों में राज्य कोटे की सभी सीटें 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर भरने की अनुमति देने की अपनी काफ़ी समय से लंबित मांग को दोहराती है.”(bbc.com/hindi)


