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जूनियर वकीलों को आर्थिक मदद पर हाईकोर्ट ने कहा- सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस नियम बनाएं
05-May-2026 12:19 PM
जूनियर वकीलों को आर्थिक मदद पर हाईकोर्ट ने कहा- सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस नियम बनाएं

राज्य सरकार ने कहा-फाइल वित्त विभाग में लंबित, जल्द मंजूरी की उम्मीद

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 5 मई। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जूनियर वकीलों को मासिक आर्थिक सहायता देने की मांग से जुड़ी सुनवाई सोमवार को टल गई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि इस संबंध में प्रस्तावित योजना की फाइल फिलहाल वित्त विभाग में लंबित है और जल्द ही स्वीकृति मिलने की संभावना है।

मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि जूनियर वकीलों को आर्थिक सहायता देनी है, तो इसके लिए ठोस नियम और प्रक्रिया तय करना आवश्यक होगा। अदालत ने कहा कि केवल आश्वासन देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि एक व्यवस्थित और पारदर्शी ढांचा तैयार किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने इस मामले में विधि विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश दिया है कि वे विस्तृत हलफनामा पेश करें, जिसमें योजना की रूपरेखा, प्रक्रिया और समयसीमा स्पष्ट रूप से बताई जाए।

यह याचिका युवा अधिवक्ताओं द्वारा दायर की गई है, जिसमें उन्होंने शुरुआती दौर में आर्थिक संकट का मुद्दा उठाया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वकालत के शुरुआती वर्षों में आय बेहद कम होती है, जिससे कई प्रतिभाशाली युवा इस पेशे को छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं।

उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि देश के कई राज्यों जैसे झारखंड, आंध्र प्रदेश, केरल और पुडुचेरीमें जूनियर वकीलों को आर्थिक सहायता या स्टाइपेंड देने की व्यवस्था पहले से लागू है।  

केंद्र सरकार और बार काउंसिल ऑफ इंडिया भी इस समस्या को स्वीकार कर चुके हैं। हाल ही में बार काउंसिल ने जूनियर वकीलों के लिए न्यूनतम स्टाइपेंड का सुझाव दिया है, जिसमें शहरी क्षेत्रों में 20,000 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 15,000 रुपये मासिक तक की सिफारिश की गई है।  

अब इस मामले में अगली सुनवाई राज्य सरकार के हलफनामे के बाद होगी।


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