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एप्पल ने भारत के प्रतिस्पर्धा नियामक, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई), पर अपनी शक्तियों से आगे बढ़ने का आरोप लगाया है. कंपनी का कहना है कि आईफोन ऐप्स मार्केट से जुड़े एक एंटीट्रस्ट मामले में सीसीआई उसे अपने वित्तीय विवरण जमा करने के लिए मजबूर कर रहा है, जबकि एप्पल ने पहले ही उस कानून को अदालत में चुनौती दी है जिसके तहत जुर्माना तय किया जाता है. यह जानकारी 24 अप्रैल को दायर एक गैर- सार्वजनिक अदालती दस्तावेज से सामने आई है, जिसकी समीक्षा समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने की.
सीसीआई ने 2024 से एप्पल से वित्तीय जानकारी मांगी है, जो आम तौर पर जुर्माने की राशि तय करने के लिए जरूरी होती है. आयोग की जांच में यह निष्कर्ष निकाला गया था कि एप्पल ने अपनी प्रभुत्वशाली स्थिति का गलत इस्तेमाल किया. एप्पल ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि जब तक दिल्ली हाईकोर्ट उसके द्वारा चुनौती दिए गए पेनल्टी कानून पर फैसला नहीं देता, तब तक सीसीआई को आगे की कार्रवाई नहीं करनी चाहिए.
इस महीने सीसीआई ने एप्पल को अल्टीमेटम जारी करते हुए कहा था कि वह अपने वित्तीय दस्तावेज जमा करे और 21 मई को अंतिम सुनवाई तय की. इसके बाद एप्पल ने दिल्ली हाईकोर्ट से तत्काल दखल देने की मांग की है और 15 मई को इस मामले पर सुनवाई का अनुरोध किया है. एप्पल ने अपनी याचिका में कहा कि अंतिम सुनवाई तय करना अदालत के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करने जैसा है.
भारत में एप्पल के खिलाफ यह मामला उन कई एंटीट्रस्ट मामलों में से एक है, जिनका सामना कंपनी दुनिया भर में कर रही है. भारत एप्पल के लिए एक अहम बाजार है, जहां उसकी आईफोन की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 9 फीसदी हो गई है, जो दो साल पहले 4 फीसदी थी. हालांकि, एप्पल का कहना है कि वह भारत में गूगल के एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म की तुलना में अभी भी एक छोटा खिलाड़ी है, जो बाजार में दबदबा रखता है. (dw.com/hi)


