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सुप्रीम कोर्ट से जीत मिलने के बावजूद आदेश का पालन नहीं, अवमानना याचिका पर हुई सुनवाई
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 2 मई। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में वर्षों से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण मामले में हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया कि नियमितीकरण प्रक्रिया से संबंधित वह पत्र पेश किया जाए, जिसमें इस प्रक्रिया की रूपरेखा तय की गई है। मामले की अगली सुनवाई 4 मई से शुरू होने वाले सप्ताह में निर्धारित की गई है।
इस प्रकरण में पहले ही कर्मचारियों को बड़ी कानूनी सफलता मिल चुकी है। विश्वविद्यालय द्वारा हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका को सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है। साथ ही समीक्षा याचिका भी निरस्त हो चुकी है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कहा था कि हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं है।
विश्वविद्यालय में विजय कुमार गुप्ता सहित कुल 98 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी पिछले एक दशक से अधिक समय से सेवाएं दे रहे हैं। राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने 22 अगस्त 2008 को ऐसे कर्मचारियों के नियमितीकरण का आदेश जारी किया था, जिन्होंने 10 वर्ष या उससे अधिक सेवा पूरी कर ली थी। इसके बाद उच्च शिक्षा संचालक ने 26 अगस्त 2008 को विभागीय कर्मचारियों को नियमित करने और स्ववित्तपोषित योजना के तहत वेतनमान देने का निर्देश दिया था। कर्मचारियों को मार्च 2009 तक नियमित वेतन भी मिला, लेकिन इसके बाद बिना किसी पूर्व सूचना के भुगतान रोक दिया गया।
10 फरवरी 2010 को तत्कालीन कुलसचिव ने नियमितीकरण से जुड़े आदेश को निरस्त कर दिया। इस फैसले को चुनौती देते हुए कर्मचारियों ने अधिवक्ता दीपाली पांडे के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की। एकल पीठ ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला देते हुए नियमितीकरण का आदेश दिया, जिसे बाद में खंडपीठ ने भी बरकरार रखा।
कोर्ट के आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर कर्मचारियों ने कुलपति और कुलसचिव के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की। पिछली सुनवाई में विश्वविद्यालय ने बताया था कि प्रक्रिया जारी है। अब शुक्रवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पी.पी. साहू की पीठ के समक्ष विश्वविद्यालय ने कहा कि नियमितीकरण की रूपरेखा तय करने के लिए समिति बनाई जा रही है और 2008 के मानकों के आधार पर एक पत्र जारी किया गया है। कोर्ट ने इसी पत्र को पेश करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई तय की है।


