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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 18 जनवरी। बिलासपुर रेलवे स्टेशन के कायाकल्प और सौंदर्यीकरण की राह में आ रही कानूनी बाधाएं अब समाप्त हो गई हैं। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत प्रस्तावित कार्यों को लेकर दायर याचिकाओं को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। इससे रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास का रास्ता साफ हो गया है।
छत्तीसगढ़ की एकलपीठ में न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि रेलवे भूमि पर काबिज दुकानदारों के पास कोई वैध लीज नहीं है, इसलिए उन्हें भूमि खाली करनी होगी। अदालत ने कहा कि बिना वैध दस्तावेजों के रेलवे जमीन पर बने रहना कानूनन सही नहीं है।
रेलवे क्षेत्र में स्थित बुधवारी बाजार में वर्षों से व्यवसाय कर रहे दुकानदारों ने स्टेशन के पुनर्निर्माण कार्य के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। उनका तर्क था कि लंबे समय से दुकानें संचालित करने के कारण उन्हें हटाया नहीं जाना चाहिए। अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।
हाईकोर्ट ने रेलवे प्रशासन को निर्देश दिया है कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले दुकानदारों को कम से कम 7 दिन का अंतिम नोटिस दिया जाए। इस अवधि में दुकानदार अपने सामान और ढांचे स्वयं हटा सकेंगे, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
इस फैसले के बाद बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत प्रस्तावित विकास और सौंदर्यीकरण कार्यों में कानूनी रुकावट दूर हो गई है।


