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सिम्स में 5 साल के बच्चे की दुर्लभ बीमारी का सफल ऑपरेशन, पहली बार हुआ ऐसा इलाज
18-Jan-2026 12:18 PM
सिम्स में 5 साल के बच्चे की दुर्लभ बीमारी का सफल ऑपरेशन, पहली बार हुआ ऐसा इलाज

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 18 जनवरी। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान  बिलासपुर के ऑर्थोपेडिक्स विभाग ने पहली बार जन्मजात पटेला डिसलोकेशन (घुटने की हड्डी का बार-बार खिसकना) से पीड़ित 5 वर्षीय बच्चे का सफल ऑपरेशन किया गया।  सर्जरी के बाद बच्चा अब सामान्य रूप से चलने लगा है।

डॉक्टरों के अनुसार यह बीमारी अत्यंत दुर्लभ है, जो लगभग प्रति एक लाख बच्चों में 5 से 6 में पाई जाती है। इस सफल सर्जरी ने न सिर्फ बच्चे को राहत दी, बल्कि SIMS की तकनीकी क्षमता को भी साबित किया है।

लोरमी निवासी गुलशन साहू (5 वर्ष) को 27 दिसंबर 2025 को उसके परिजन सिम्स की ऑर्थोपेडिक्स ओपीडी में लेकर पहुंचे थे। परिजनों ने बताया कि जब से बच्चा चलना शुरू हुआ, उसकी घुटने की हड्डी बार-बार अपनी जगह से हट जाती थी, जिससे उसे चलने में काफी परेशानी होती थी।

बच्चे की जांच ऑर्थोपेडिक्स विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. संजय घिल्ले ने की। एक्स-रे और एमआरआई जांच के बाद हैबिचुअल पटेला डिसलोकेशन की पुष्टि हुई।
मामले की विभागाध्यक्ष डॉ. ए. आर. बेन को जानकारी दी गई। एनेस्थीसिया विभाग से फिटनेस मिलने के बाद 29 दिसंबर 2025 को ऑपरेशन किया गया।

ऑपरेशन के दौरान घुटने की हड्डी को नियंत्रित करने वाली एक ओर की मांसपेशी को ढीला और दूसरी ओर की मांसपेशी को मजबूत किया गया। सर्जरी के बाद घुटने की हड्डी पूरी तरह स्थिर हो गई, और बच्चा अब सामान्य रूप से चल पा रहा है।

इस सर्जरी में ऑर्थोपेडिक्स टीम से डॉ. ए. आर. बेन, डॉ. संजय घिल्ले, डॉ. अविनाश अग्रवाल और डॉ. प्रवीण द्विवेदी शामिल रहे।
एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. मिल्टन और डॉ. श्वेता कुजूर की अहम भूमिका रही। संपूर्ण उपचार आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पूरी तरह निशुल्क किया गया, जिससे परिजनों को किसी भी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ा।

डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह के दुर्लभ और जटिल मामलों का सफल इलाज यह दर्शाता है कि अब राज्य के मरीजों को बड़े शहरों में जाने की जरूरत कम होती जा रही है।


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