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फर्जी वर्क ऑर्डर केस में डिप्टी कलेक्टर को हाईकोर्ट से झटका, एफआईआर रद्द करने की मांग खारिज
16-Jan-2026 12:02 PM
फर्जी वर्क ऑर्डर केस में डिप्टी कलेक्टर को हाईकोर्ट से झटका, एफआईआर रद्द करने की मांग खारिज

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 16 जनवरी। फर्जी कार्यादेश जारी कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के मामले में फंसी महिला डिप्टी कलेक्टर को हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। अदालत ने साफ कहा कि यह मामला सुनवाई और साक्ष्यों के मूल्यांकन का है, जिसे ट्रायल कोर्ट में ही तय किया जाना चाहिए।

महिला डिप्टी कलेक्टर ज्योति बबली कुजूर ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। उन पर वाड्रफनगर जनपद पंचायत की सीईओ रहते हुए फर्जी वर्क ऑर्डर जारी कर करीब 30 लाख रुपये के सरकारी फंड को नुकसान पहुंचाने का आरोप है।

पुलिस ने जांच के बाद कुजूर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 467, 468, 420, 409 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 (1-13) के तहत अपराध दर्ज कर चालान पेश किया है।

याचिकाकर्ता का कहना था कि वाड्रफनगर के तत्कालीन एसडीओपी से उनकी व्यक्तिगत रंजिश थी और इसी कारण उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया। उन्होंने यह भी बताया कि विभागीय जांच पूरी होने के बाद 28 जुलाई 2021 को उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया गया था, इसलिए आपराधिक मामला भी समाप्त किया जाना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि शिकायत एसडीओपी ने नहीं, बल्कि वेद प्रकाश पांडेय ने दर्ज कराई थी। अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता की दलीलें साक्ष्यों की जांच से जुड़ी हैं, जो ट्रायल कोर्ट का विषय है। इन तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी। अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया ट्रायल कोर्ट में चलेगी।


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