कोण्डागांव

हाईकोर्ट के आदेश के बाद मध्याह्न भोजन रसोईया चैतराम मरकाम को बढ़ा हुआ मानदेय मिलने का रास्ता साफ
08-Feb-2026 8:52 PM
हाईकोर्ट के आदेश के बाद मध्याह्न भोजन रसोईया चैतराम मरकाम को बढ़ा हुआ मानदेय मिलने का रास्ता साफ

छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोंडागांव, 8 फरवरी। शासकीय प्राथमिक शाला केराडीह, विकासखंड बड़े राजपुर, जिला कोंडागांव में मध्याह्न भोजन योजना के अंतर्गत रसोईया के पद पर कार्यरत चैतराम मरकाम के पक्ष में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने फैसला सुनाया है। इस आदेश के अनुसार उन्हें न्यूनतम मजदूरी दर के आधार पर मानदेय देने के निर्देश दिए गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार चैतराम मरकाम लंबे समय से स्कूल में रसोईया के रूप में कार्य कर रहे हैं। उनके अनुसार प्रतिदिन कई घंटे कार्य करने के बावजूद उन्हें मात्र 1200 रुपये मासिक मानदेय प्राप्त हो रहा था। वेतन वृद्धि के लिए उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी से कई बार निवेदन किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।

याचिका पर 7 जनवरी 2022 को हाईकोर्ट द्वारा आदेश पारित किया गया था, परंतु आवेदक का कहना है कि शासन-प्रशासन द्वारा आदेश के अनुरूप अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद चैतराम मरकाम ने पुन: उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की।
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एन.के. मालवीय ने पक्ष रखा। प्रतिवादी पक्ष की ओर से दीक्षा पांडे (केंद्रीय सरकारी अधिवक्ता),  रमाकांत मिश्रा (उप सॉलिसिटर जनरल) तथा राज्य शासन की ओर से पैनल वकील दशरथ प्रजापति उपस्थित रहे।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने न्यायालय में तर्क दिया कि चैतराम मरकाम मिड-डे मील योजना के अंतर्गत नियमित रूप से कार्य कर रहे हैं और संबंधित स्कूल के प्रधानाध्यापक द्वारा इस संबंध में प्रमाणपत्र भी जारी किया गया है। अधिवक्ता ने यह भी कहा कि उन्हें प्रतिदिन केवल 40 रुपये के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है, जबकि राज्य सरकार द्वारा जोन-सी के लिए निर्धारित न्यूनतम मजदूरी दर इससे कहीं अधिक है।

अधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष यह तर्क भी रखा कि मिड-डे मील तैयार करने का कार्य एक निरंतर श्रमसाध्य कार्य है, जिसमें प्रतिदिन कई घंटे लगते हैं, जबकि प्रतिवादी पक्ष द्वारा यह कहा गया कि यह कार्य मात्र डेढ़ घंटे में पूरा हो जाता है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माननीय न्यायाधीश ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के मामले पर पुनर्विचार किया जाए और किए गए कार्य के अनुसार उचित मानदेय प्रदान किया जाए।
इस प्रकरण में सुनवाई पूरी होने के बाद 19 दिसंबर 2025 को आदेश सुरक्षित रखा गया था, जिसे 15 जनवरी 2026 को पारित किया गया। न्यायालय के आदेश के अनुसार चैतराम मरकाम को संबंधित अवधि के दौरान 306.67 रुपये प्रतिदिन (महंगाई भत्ता सहित) अथवा कम से कम 260 रुपये प्रतिदिन (बिना महंगाई भत्ता) का भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।

इस निर्णय के बाद मध्याह्न भोजन योजना में कार्यरत अन्य रसोइयों को भी इसका लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई तथा कोंडागांव के विभिन्न स्कूलों में कार्यरत रसोइयों द्वारा इसी मुद्दे को लेकर कुल 23 याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर की गई थीं। इन याचिकाओं में आदिवासी नेत्री एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्रीमती खगेश ठाकुर के मार्गदर्शन का उल्लेख किया गया है।
हाईकोर्ट के इस आदेश से संबंधित याचिकाकर्ताओं को न्यूनतम मजदूरी के अनुरूप मानदेय प्राप्त होने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।


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