कोण्डागांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोण्डागांव, 17 अगस्त। शासकीय गुण्डाधुर स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कोण्डागांव में 79वाँ स्वतंत्रता दिवस बड़े उल्लास और राष्ट्रभक्ति की गूंज के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रात: 8 बजे राष्ट्रीय ध्वज फहराकर हुआ। तिरंगे की लहराती शान ने पूरे प्रांगण को देशभक्ति की भावना से सराबोर कर दिया।
महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. सरला आत्राम ने ध्वजारोहण कर विद्यार्थियों, प्राध्यापकों और आमंत्रित अतिथियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ दीं। इसके पश्चात महाविद्यालय के पूर्वछात्र जिन्होंने देश सेवा में अपने प्राणों की आहुति दी उन्हें नमन कर 2 मिनट का मौन रखा गया। प्राचार्या डॉ. आत्राम ने अपने उद्बोधन में स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का स्मरण करते हुए कहा कि हमारी आज़ादी केवल तिरंगे के सम्मान में नहीं, बल्कि हर विद्यार्थी के भीतर मौजूद राष्ट्रभक्ति में जीवित है। हमें न केवल अपने अधिकारों का, बल्कि कर्तव्यों का भी पालन करना चाहिए। नई शिक्षा नीति का उद्देश्य भी यही है कि युवा पीढ़ी में राष्ट्र निर्माण की चेतना और आत्मनिर्भरता का संचार हो।
इसके पश्चात वरिष्ठ प्राध्यापिका डॉ. किरण नुरुटी ने अपने विचार रखे। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि स्वतंत्रता का सही अर्थ तभी है जब हम समाज में समानता, शिक्षा और सेवा की भावना को जीवित रखें। उन्होंने कहा -आज का दिन हमें उन वीर बलिदानियों की याद दिलाता है जिनके बिना यह आज़ादी संभव नहीं थी। हमें अपने चरित्र, आचरण और कर्म से उनके सपनों का भारत बनाना होगा।
वनस्पति शास्त्र विभागाध्यक्ष एवं एनएसएस जिला संगठक शशिभूषण कन्नौजे ने कहा स्वतंत्रता केवल राजनीतिक नहीं है, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक स्तर पर भी इसका महत्व है। एनएसएस जैसे संगठन युवाओं को राष्ट्र निर्माण में प्रत्यक्ष रूप से योगदान करने का अवसर प्रदान करते हैं। साथ ही उन्होंने तिरंगे की अस्मिता को बनाए रखने की शपथ दिलाई।
उद्बोधनों के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम का आरंभ हुआ। महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत प्रस्तुतियाँ देकर समा बांध दिया।
बुधराम ने हल्बी भाषा में देशभक्ति गीत प्रस्तुत कर स्थानीय संस्कृति और स्वतंत्रता के महत्व को रेखांकित किया।
कलावती ने अपनी प्रस्तुति में देशभक्ति गीत गाकर सभी का मन मोह लिया।
इसके साथ ही महाविद्यालय की छात्रा बुलबुल देउरी ने अपने भाषण में स्वतंत्रता संग्राम की ऐतिहासिक गाथाओं का स्मरण कराया।
मानसी ठाकुर ने युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि आज का विद्यार्थी ही कल का राष्ट्र निर्माता है।
द्रोण प्रसाद ने अपने वक्तव्य में विज्ञान और तकनीक के माध्यम से देश को आगे बढ़ाने के संकल्प का आह्वान किया।
सम्पूर्ण कार्यक्रम का संचालन नसीर अहमद और विनय कुमार देवांगन ने किया, जिनका सहयोग संचालन समिति के लोचन सिंह वर्मा और नेहा बंजारे ने किया।
अंत में डॉ. आकाश वासनीकर ने सभी अतिथियों, प्राध्यापकों, विद्यार्थियों और आयोजन समिति के सदस्यों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय परिवार के समस्त प्राध्यापक - डॉ. पुरोहित सोरी, शोभाराम यादव, श्रीमती रूपा सोरी, डॉ. अलका शुक्ला, डॉ. देवाशीष हालदार, श्री अर्जुन सिंह नेताम सहित सभी विभागों के शिक्षक-कर्मचारी, एनसीसी के कैडेट्स, एनएसएस के स्वयंसेवक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।


