कोण्डागांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोंडागांव, 7 अगस्त। शासकीय गुण्डाधुर स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कोण्डागांव में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के स्वागत एवं मार्गदर्शन हेतु दीक्षारंभ कार्यक्रम का आयोजन गरिमामयी वातावरण में किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रमुख बिंदुओं पर विद्यार्थियों को जानकारी देने हेतु विशेष व्याख्यान सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें प्राचार्य डॉ. सरला आत्राम सहित अनेक विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को संबोधित किया।
प्राचार्य डॉ. सरला आत्राम ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए नवप्रवेशित विद्यार्थियों का महाविद्यालय परिवार में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि दीक्षारंभ कार्यक्रम केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को शिक्षण, अनुशासन, मूल्य एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति की मूल भावना से जोडऩे का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने एनईपी 2020 के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह नीति विद्यार्थियों के समग्र विकास को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जो न केवल ज्ञान के स्तर को बढ़ाएगी, बल्कि कौशल, मूल्य और व्यक्तित्व विकास में भी सहायक सिद्ध होगी।
एनईपी संयोजक डॉ. किरण नुरूटी ने शब्दावली, क्रेडिट सिस्टम और करिकुलम फ्रेमवर्क की विस्तृत व्याख्या करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति में मल्टी-डिसिप्लिनरी और मल्टी-एंट्री-एग्जिट सिस्टम को लागू किया गया है, जिससे विद्यार्थियों को अधिक लचीलापन और अवसर मिलेंगे। उन्होंने ‘क्रेडिट ट्रांसफर सिस्टम’ और ‘डिजिटल अकादमिक बैंक’ के बारे में जानकारी दी।
डॉ. पुरोहित सोरी ने विद्यार्थियों को आंतरिक मूल्यांकन और सेमेस्टर परीक्षा प्रणाली के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि अब मूल्यांकन केवल परीक्षाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षण प्रक्रिया का निरंतर हिस्सा बन जाएगा। इस प्रणाली से विद्यार्थियों की भागीदारी, प्रस्तुतीकरण, प्रोजेक्ट्स, असाइनमेंट और रचनात्मकता को भी महत्व मिलेगा।
शोभाराम यादव ने अपने वक्तव्य में वैल्यू एडेड कोर्स और एबिलिटी एनहांसमेंट कोर्सेस की जानकारी देते हुए कहा कि यह कोर्सेस विद्यार्थियों के वैयक्तिक एवं व्यावसायिक कौशल को निखारने में सहायक होंगे। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे इन अतिरिक्त पाठ्यक्रमों में रुचि लेकर अपने भविष्य को सशक्त बनाएं। जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर श्री शशिभूषण कन्नौजे ने अत्यंत सहज और संवादात्मक शैली में जेनेरिक इलेक्टिव्स एवं स्किल एनहांसमेंट कोर्सेस के उद्देश्य एवं लाभों की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाने, सामाजिक जिम्मेदारी निभाने और रोजगारोन्मुख बनने के लिए तैयार करते हैं।
जिला स्तरीय द्वितीय मास्टर ट्रेनर नसीर अहमद ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को विद्यार्थियों के लिए एक नई दिशा और अवसर के रूप में परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि अब शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विद्यार्थियों को सोचने, सृजन करने और समाधान ढूंढने की क्षमता भी प्रदान करेगी। उन्होंने डिजिटल लर्निंग और रिसर्च ओरिएंटेड सोच पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि नई शिक्षा नीति उन्हें रिसर्च प्रोजेक्ट्स, केस स्टडीज, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, जैसे कार्यों के लिए भी प्रोत्साहित करती है। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में ई-लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म, डिजिटल कंटेंट, वर्चुअल लैब्स जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिनसे विद्यार्थियों को वैश्विक मानकों की शिक्षा मिल सके। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए और सभी वक्ताओं से मिले मार्गदर्शन के प्रति आभार प्रकट किया। कार्यक्रम के बाद विद्यार्थियों को जेनेरिक इलेक्टिव और वैल्यू एडेड कोर्स चुनने की स्वतंत्रता दी गई।
कार्यक्रम का समन्वयन विनय कुमार देवांगन व रूपा सोरी के साथ डॉ. देवाशीष हालदार, डॉ अलका शुक्ला एवं नेहा बंजारे द्वारा सफलतापूर्वक किया गया विषयों को चुनने हेतु विज्ञान संकाय से डॉ. अलका शुक्ला व लोचन सिंह वर्मा, कला संकाय से समलेश पोटाई व अर्जुन नेताम और वाणिज्य संकाय में डॉ. आकाश वासनीकर ने दायित्व निभाया जिसमें अतिथि व्याख्याताओं ने भी संपूर्ण सहयोग किया।


