कोण्डागांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोण्डागांव, 15 मई। जिले के सुदूर वनांचल में स्थित भोगापाल ग्राम के समीप, लसूरा नदी के तट और घने जंगलों के बीच बस्तर अंचल के एकमात्र विशाल बौद्ध चैत्यगृह में गौतम बुद्ध जयंती उल्लास के साथ मनाई गई। यह स्थल कोण्डागांव मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित है, जहां संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, छत्तीसगढ़ द्वारा संरक्षित भगवान बुद्ध की भव्य प्रतिमा स्थापित है।
बुद्ध पूर्णिमा पर ग्रामवासियों और बौद्ध अनुयायियों ने सामूहिक रूप से त्रिशरण और पंचशील का पाठ किया। दीप, अगरबत्ती, पुष्पमालाएं, खीर और फल अर्पित कर भगवान बुद्ध को नमन किया गया। समारोह में सैकड़ों श्रद्धालु उपासक-उपासिकाएं शामिल हुए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक नीलकंठ टेकाम थे। उनके साथ रायपुर संभाग के कमिश्नर महादेव कावरे, डॉ. कृष्णमूर्ति कांबले, धंसराज टंडन (जिला अध्यक्ष - सर्व अनुसूचित जाति वर्ग), झाड़ीराम सलाम (जिला सरपंच संघ अध्यक्ष), पूर्व इनकम टैक्स कमिश्नर गिरधारी लाल भगत, बौद्ध समाज अंतागढ़ अध्यक्ष घनश्याम रामटेके, उप संचालक अनिरुद्ध कोचे, बौद्ध समाज लंजोड़ा अध्यक्ष ममता खापर्डे, डॉ. किरण कांबले (रायपुर), शंभूनाथ चांदेकर (विश्रामपुरी), हिमांशु दुर्गम (बीजापुर), मंगलूराम नुरेटी (नारायणपुर), धर्मेंद्र मेश्राम (कांकेर), कमलेश रामटेके (सचिव - बौद्ध समाज, जगदलपुर), जयंत वासनीकर (पूर्व अध्यक्ष, लंजोड़ा), सरपंच शिवशंकर कावड़े (बण्डापाल), रामसाय नाग (सरपंच, भोगापाल) सहित अनेकों गणमान्य नागरिकों ने उपस्थिति दर्ज कराई।
इस अवसर पर वक्ताओं ने भोगापाल स्थित बौद्ध प्रतिमा स्थल को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन और ध्यान केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक नीलकंठ टेकाम ने घोषणा की कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का भोगापाल दौरा इसी माह प्रस्तावित है, जहां यह मांग मुख्यमंत्री के समक्ष रखी जाएगी ताकि इसे अंतरराष्ट्रीय बौद्ध तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किया जा सके।
इस भव्य आयोजन में कोण्डागांव, बस्तर, नारायणपुर, कांकेर, बीजापुर सहित राज्य और देशभर के बुद्ध धर्म के लाखों अनुयायी शामिल हुए। ग्रामवासियों द्वारा सभी श्रद्धालुओं के लिए भोजन भंडारे का आयोजन भी किया गया।
कार्यक्रम का संचालन अनिल खोबरागड़े ने किया और धन्यवाद ज्ञापन बौद्ध समिति भोगापाल के सचिव दिनेश सोरी द्वारा किया गया। कार्यक्रम पूर्णत: शांतिपूर्ण, धार्मिक और प्रेरणादायक वातावरण में सम्पन्न हुआ।


