कोण्डागांव

युवा किसान मशरूम की खेती से न केवल खुद को, बल्कि पूरे गांव को बना रहा आत्मनिर्भर
15-Apr-2025 2:57 PM
युवा किसान मशरूम की खेती से न केवल खुद  को, बल्कि पूरे गांव को बना रहा आत्मनिर्भर

धान-मक्का की पारंपरिक खेती से आगे बढक़र संजय ने मशरूम उत्पादन में दिखाई राह, युवाओं व किसानों को दे रहा नई दिशा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोंडागांव, 15 अप्रैल।
कोंडागांव जिले के माकड़ी ब्लॉक के छोटे से गांव बागबेड़ा  में रहने वाला युवा किसान संजय, आज सैकड़ों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है। जहां जिले के अधिकतर किसान आज भी धान और मक्के की पारंपरिक खेती पर निर्भर हैं, वहीं संजय ने मशरूम की खेती को अपनाकर अपनी और गांव की किस्मत बदल दी है।

कम जमीन, कम लागत और अधिक मुनाफा —संजय की इस खेती का यही मूल मंत्र है। वह बताते हैं कि मशरूम की खेती न तो बहुत अधिक भूमि मांगती है और न ही भारी निवेश। कुछ बोरे, थोड़ी नमी और उचित देखरेख के साथ यह खेती घर के किसी कोने में भी की जा सकती है। इसके ज़रिए संजय आज प्रति किलो 200 रुपए तक कमा रहे हैं, जो पारंपरिक फसलों की तुलना में कई गुना ज़्यादा लाभकारी है।

पारंपरिक खेती से आगे की सोच
कोड़ागांव के कई किसान आज भी केवल धान और मक्के की खेती में लगे हैं, जिनमें मौसम पर निर्भरता और बाजार मूल्य की अनिश्चितता बनी रहती है। संजय का कहना है कि यदि किसान थोड़ा सा प्रयोग करें और मशरूम जैसी वैकल्पिक फसलों की ओर रुख करें, तो वे न केवल अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं बल्कि बेरोजगारी का समाधान भी खुद कर सकते हैं।

महिलाओं और युवाओं को दे रहे प्रशिक्षण
संजय अब अपने अनुभव को बांटने में भी पीछे नहीं हैं। वे महिला स्व-सहायता समूहों और युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें भी इस नई खेती से जोड़ रहे हैं। यह पहल न केवल रोजगार का साधन बन रही है, बल्कि सामाजिक रूप से भी बदलाव ला रही है।

संजय ने बताया मशरूम की किस्म के आधार पर इसकी पैदावार का समय अलग-अलग हो सकता है, लेकिन आमतौर पर  बटन मशरूम- तैयार होने का समय- 30 से 45 दिन, अवधि- बीज  लगाने के 15-20 दिन बाद बिछाव  किया जाता है, और उसके 10-15 दिन बाद फल निकलने लगते हैं।  ऑएस्टर मशरूम -तैयार होने का समय- 20 से 30 दिन, अवधि- स्पॉन लगाने के 15-20 दिन में मशरूम निकलने लगते हैं।

मिल्की मशरूम -तैयार होने का समय- 45 से 60 दिन, अवधि- गर्म जलवायु में उगाया जाता है, थोड़ा समय ज्यादा लगता है।

सरकारी मदद और मार्गदर्शन
संजय की इस सफलता को देखते हुए अब कृषि विभाग और विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्र भी किसानों को मशरूम उत्पादन में प्रशिक्षित करने लगे हैं। यह संकेत है कि अगर किसान आगे बढक़र नई तकनीक और खेती के नए तरीके अपनाएं, तो कृषि क्षेत्र में क्रांति संभव है।


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