कोण्डागांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोण्डागांव, 23 मार्च। शासकीय गुंडाधुर स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शनिवार, 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया गया। यह कार्यक्रम महाविद्यालय के एनसीसी और भूगोल विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सीआर पटेल ने की।
कार्यक्रम का संचालन एनसीसी एएनओ नेहा बंजारे ने किया। उन्होंने इस वर्ष के विश्व जल दिवस की थीम ग्लेशियर प्रिजर्वेशन (ग्लेशियर संरक्षण) पर प्रकाश डालते हुए जल संरक्षण और ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों पर चर्चा की। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष समलेश पोटाई थे। उन्होंने कवि रहीम के प्रसिद्ध दोहे रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून का उल्लेख करते हुए जल संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि पृथ्वी पर 71त्न जल उपलब्ध है, लेकिन इसमें से 97त्न जल खारा है और 68त्न जल बर्फ के रूप में जमे होने के कारण पीने योग्य जल केवल 3त्न ही है।
उन्होंने बेंगलुरु शहर की जल संकट की समस्या का उदाहरण देते हुए कहा कि आर्थिक विकास के साथ-साथ जल और पर्यावरण संरक्षण भी अनिवार्य है। उन्होंने जल शक्ति मंत्रालय के नल जल मिशन और जल प्रदूषण नियंत्रण के विभिन्न प्रयासों पर भी चर्चा की। वाणिज्य विभाग के विभागाध्यक्ष आकाश वासनिकर ने समुद्री जीवों और रेयर फिश प्रजातियों के संरक्षण पर बात की। उन्होंने बताया कि ग्लोबल वार्मिंग और समुद्री जल के तापमान में बढ़ोतरी के कारण ऑक्सीजन की कमी हो रही है, जिससे ये दुर्लभ मछलियां मर रही हैं। उन्होंने रायपुर को रेड जोन घोषित किए जाने पर भी प्रकाश डाला, जो वहां की गंभीर जल समस्या को दर्शाता है।
कार्यक्रम के अंत में नेहा बंजारे ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि हम जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के नियमों को अपने जीवन में अपनाते हैं, तो हम भविष्य के लिए एक स्वच्छ और समृद्ध पर्यावरण बना सकते हैं।
इस अवसर पर एनसीसी परचनपाल यूनिट के हवलदार शेंडगे ज्ञानेश्वर, सहायक प्राध्यापक पुरोहित कुमार सोरी, जगतु, डॉ. अलका शुक्ला, रूपा सोरी, नसीर अहमद, विनय देवांगन, डॉ. देवाशीष हालदार, शशिभूषण कन्नौजे, शोभा राम यादव, लोचन वर्मा, हनी चोपड़ा सहित महाविद्यालय के समस्त स्टाफ, एनसीसी और एनएसएस के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।


