कोण्डागांव
शिक्षक के समर्थन में आगे आया आदिवासी समाज
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोण्डागांव, 2 सितंबर। शासकीय उच्च प्राथमिक शाला बूंदापारा गिरोला में पदस्थ शिक्षक एलबी चरण मरकाम को देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में कलेक्टर ने निलंबित कर दिया है।
शिक्षक पर आरोप है कि उन्होंने हिंदू धर्म के देवी-देवताओं के विरुद्ध क्लास में शाला के छात्र-छात्राओं के समक्ष आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस टिप्पणी को लेकर एक कथित ऑडियो वायरल होने के बाद ग्रामीणों के माध्यम से कलेक्टर से मामले की शिकायत की गई। इस पर कलेक्टर पुष्पेंद्र कुमार मीणा ने त्वरित कार्यवाही करते हुए शिक्षक एलबी चरण मरकाम को 1 सितंबर की देर शाम निलंबित कर दिया। इधर शिक्षक के विरुद्ध हो रहे कार्यवाही के बीच मामले की भनक जैसे ही आदिवासी समाज को लगी, वह उसके बचाव में सिटी कोतवाली कोण्डागांव पहुंच गए। आदिवासी समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि, शिक्षक का निलंबन नियम विरुद्ध किया गया है। साथ ही उसके साथ सरेआम मारपीट भी की गई है।
दरअसल, ग्राम पंचायत गिरोला के जनप्रतिनिधियों ग्रामीणों व बड़े बुजुर्गों का दावा है कि बूंदापारा में पदस्थ शिक्षक चरण मरकाम के द्वारा कृष्ण जन्माष्टमी के ठीक बाद स्कूल में बच्चों को हिंदू देवी देवताओं के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए पढ़ाया गया। ग्रामीणों का दावा है कि शिक्षक के माध्यम से बच्चों को जन्माष्टमी पर उपवास रखने को लेकर मारपीट भी किया गया है। ग्रामीणों की शिकायत व गांव में तनाव पूर्ण माहौल को देखते हुए मौके पर राजस्व अमला व सिटी कोतवाली पुलिस पहुंची। यहां राजस्व अमला प्रतिवेदन तैयार कर उच्चाधिकारियों के समक्ष प्रकरण प्रस्तुत करने का बात कह रहे हैं, तो वहीं तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए शिक्षक चरण मरकाम को पुलिस ने अपने सुरक्षा में ले लिया।
इस पूरे मामले में विश्व हिंदू परिषद और कोण्डागांव का आदिवासी समाज आमने सामने नजर आ रहा है। शिक्षक चरण मरकाम के बचाव में आगे आए गोंडवाना समाज समन्वयक समिति जिला अध्यक्ष बुधसिंह नेताम ने चर्चा करते हुए कहा, चरण मरकाम के विरुद्ध योजनाबद्ध तरीके से संयंत्र रचा गया है। चरण मरकाम पर आरोप लगाया गया है कि वे ईसाई मिशनरी से कन्वर्टेड है, जबकि ऐसा नहीं है। बुधसिंह नेताम ने आगे बताया, शिक्षक चरण मरकाम को पंचायत के बैठक में बुलाकर सरेआम पीटा गया है जबकि अनुसूचित क्षेत्र होने से किसी सभा के समक्ष ऐसा नहीं किया जा सकता। इन सबके अलावा उन्होंने विश्व हिंदू परिषद के कार्य प्रणाली पर भी सवालिया निशान उठाया है।


