गरियाबंद
चार वर्षों में बड़ी संरक्षण उपलब्धि
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
गरियाबंद, 10 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व ने वन्यजीव संरक्षण, वन पुनर्जीवन और जलवायु संरक्षण के क्षेत्र में अपनी उल्लेखनीय उपलब्धियां साझा की हैं। पिछले चार वर्षों में रिजर्व के कोर एवं बफर क्षेत्र से 956 हेक्टेयर (लगभग 2500 एकड़) अतिक्रमण हटाया गया, जिसकी अनुमानित नेट प्रेजेंट वैल्यू (एनपीवी) करीब 573 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस अभियान के दौरान संरक्षण टीम पर चार जानलेवा हमले भी हुए, लेकिन कार्रवाई लगातार जारी रही।
550 से अधिक शिकारी और तस्करों पर कार्रवाई
वन विभाग द्वारा चलाए गए विशेष एंटी-पोचिंग अभियानों में 550 से अधिक शिकारी, वन्यजीव तस्कर, अतिक्रमणकारी एवं अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों को गिरफ्तार अथवा निरुद्ध किया गया। जरूरत पडऩे पर ओडिशा और महाराष्ट्र तक अभियान चलाकर वन्यजीव अपराधों पर अंकुश लगाने का प्रयास किया गया।
दुर्लभ वन्यजीवों की बढ़ती मौजूदगी
संरक्षण प्रयासों का असर अब जंगलों में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। रिजर्व क्षेत्र में मालाबार पाइड हॉर्नबिल, भारतीय विशाल गिलहरी, उडऩ गिलहरी, मूषक हिरण, पैंगोलिन, ऊदबिलाव, चौसिंगा, शाहीन फाल्कन और दुर्लभ ट्राइकारिनेट हिल टर्टल जैसी प्रजातियों की उपस्थिति लगातार दर्ज की जा रही है। यह क्षेत्र की बेहतर होती पारिस्थितिक स्थिति का संकेत माना जा रहा है।

बाघ गणना में मिले दुर्लभ वन्यजीव
हाल ही में संपन्न अखिल भारतीय बाघ गणना-2026 के दौरान भी कई दुर्लभ वन्यजीव कैमरा ट्रैप में दर्ज हुए। इनमें माउस डियर, स्मॉल क्लॉड ऑटर, यूरेशियन ऑटर और पैंगोलिन शामिल हैं। विशेष रूप से पैंगोलिन का पहली बार कैमरा ट्रैप में दर्ज होना छत्तीसगढ़ के वन्यजीव संरक्षण के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
तकनीक से कम हुआ मानव-वन्यजीव संघर्ष
मानव-वन्यप्राणी संघर्ष को कम करने के लिए टाइगर रिजर्व में हाथी ट्रैकिंग एवं अलर्ट एप, थर्मल ड्रोन सर्विलांस और एआई कैमरा जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इन नवाचारों से वन्यजीवों की निगरानी और ग्रामीणों की सुरक्षा दोनों को मजबूती मिली है।

हॉर्नबिल और गिलहरियों के लिए विशेष अभियान
हॉर्नबिल संरक्षण के लिए ‘हॉर्नबिल रेस्टोरेंट’ पहल के तहत स्थानीय समुदायों के सहयोग से फलदार देशी वृक्षों का रोपण और संरक्षण किया जा रहा है। वहीं ‘वीविंग द कैनोपी कवर’ अभियान के माध्यम से वृक्षों के बीच प्राकृतिक संपर्क बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है, जिससे विशाल गिलहरी और उडऩ गिलहरी जैसी प्रजातियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित हो सके।
जनभागीदारी बनी सफलता की कुंजी
वन सुरक्षा समितियों, महिला स्व-सहायता समूहों, ग्रामीण युवाओं और स्थानीय विद्यालयों ने वृक्षारोपण, वन्यजीव निगरानी, अग्नि नियंत्रण, घोंसला संरक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाई है। संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देने में स्थानीय समुदायों की भूमिका अहम रही है।
जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में भी अहम योगदान
अतिक्रमण मुक्त कराए गए क्षेत्रों में प्राकृतिक पुनर्जनन और वन बहाली की प्रक्रिया तेज हुई है। इससे कार्बन अवशोषण क्षमता बढ़ी है और वन क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वन विभाग का मानना है कि यह प्रयास वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने की दिशा में भी बड़ी उपलब्धि है।
संरक्षण, विकास और प्रकृति का संगम
उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व की यह सफलता दर्शाती है कि वैज्ञानिक प्रबंधन, सख्त संरक्षण कार्रवाई और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से न केवल वन्यजीवों की वापसी संभव है, बल्कि वनों का पुनर्जागरण और जलवायु संरक्षण भी प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। आज यहां दिखाई दे रही जैव विविधता इस सफलता की जीवंत गवाही दे रही है।


