गरियाबंद
324 ग्राम पंचायतों में सर्वे, कलेक्टर ने दुर्लभ तालपत्र का किया निरीक्षण
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
गरियाबंद, 25 अप्रैल। गरियाबंद जिले में ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए चलाए जा रहे ‘ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान’ ने गति पकड़ ली है। अभियान के तहत जिले की 324 ग्राम पंचायतों और 6 नगरीय निकायों में प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वे किया जा रहा है।
इसी क्रम में कलेक्टर बी.एस. उइके ने गरियाबंद विकासखंड के ग्राम बोकरामुड़ा (ग्राम पंचायत दांतबायकला) में बिसुराम सोरी के घर पहुंचकर लगभग एक सदी पुरानी उडिय़ा भाषा में लिखी दुर्लभ तालपत्र पांडुलिपि का अवलोकन किया। बताया गया कि 229 पन्नों की इस पांडुलिपि में ज्योतिषीय गणनाएं, शुभ मुहूर्त निर्धारण और उस समय की परंपराओं का विस्तृत उल्लेख है, जिसका उपयोग पहले विवाह, गृह प्रवेश व अन्य मांगलिक कार्यों में किया जाता था।
कलेक्टर की उपस्थिति में पांडुलिपि की जियो-टैगिंग कर संरक्षण की दिशा में पहल की गई। उन्होंने इसे जिले की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पहचान बताते हुए इसके डिजिटल संरक्षण और शोध कार्यों के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
कलेक्टर उइके ने नागरिकों से अपील की है कि 70 वर्ष या उससे अधिक पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियों की जानकारी प्रशासन को दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्वे पूरी तरह स्वैच्छिक है और इससे पांडुलिपियों के स्वामित्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
अभियान में मठ-मंदिरों, पुजारियों, बैगा, चिकित्सकों, साहित्यकारों, पत्रकारों व जनप्रतिनिधियों से भी सक्रिय सहयोग की अपेक्षा की गई है। इस दौरान डिप्टी कलेक्टर नेहा भेडिय़ा, जनपद सीईओ के.एस. नागेश सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।


