गरियाबंद
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
नवापारा राजिम, 25 अप्रैल। शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोबरा नवापारा के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. तेजेंद्र साहू ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा करते हुए कहा कि उच्च तापमान के कारण गर्भावस्था में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। समुचित देखभाल और सावधानी से सुरक्षित स्वास्थ्य सुनिश्चित किया जा सकता है।
गर्मी के मौसम में लू लगने से बीमार होने के अनेक मामले आते हैं। कुछ जरूरी सावधानियां अपनाकर इससे बचा जा सकता है। ग्रीष्म ऋतु में लू चालना आम बात है। इस मौसम में तेज धूप एवं गर्मी के कारण लू लगने की संभावना रहती है। लू के लक्षण - सिर में भारीपन एवं सर दर्द होना, तेज बुखार के साथ मुंह का सूखना, चक्कर व उल्टियां होना, कमजोरी के साथ शरीर में अत्यधिक दर्द होना, पसीना नहीं आना अधिक प्यास लगना लेकिन पेशाब कम होना,भूख कम लगना, घबराहट और बैचेनी लगना, बेहोशी इत्यादि लक्षण हो सकते हैं। लू लगने का प्रमुख कारण शरीर में नमक और पानी की कमी होना है। पसीने के रूप में नमक और पानी का बड़ा हिस्सा शरीर से बाहर निकल जाता है और खून में गर्मी बढ़ जाती है।
लू लगना खतरनाक एवं जानलेवा भी हो सकता है। बहुत तेज बुखार आना, सिर भारी लगना, पसीना नहीं आना, उल्टी होना, हाथ पैर में दर्द होना, त्वचा का सूखा, गर्म व लाल होना, चक्कर एवं बेहोशी आना इसके लक्षण हैं। गर्मी के कारण लू से बचाव तथा जल जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग को दिए आवश्यक तैयारी के निर्देश। लू से बचाव के लिए अधिक से अधिक पानी पियें। यदि प्यास न लगी हो तो भी पानी पिए ताकि शरीर में पानी की कमी से होने वाली बीमारियों से बचा जा सके। हल्के रंग के पसीना शोषित करने वाले वख पहनें। गर्मी के दिनों में शीघ्र पचने वाला भोजन करना चाहिए। धूप में गमछे,चश्मा,छाता, टोपी व पैरों में चप्पल का उपयोग अवश्य करें। धूप में निकलना हो तो खाली पेट घर से बाहर न निकलें। हल्के, ढीले व सूती कपड़े पहनें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। नींबू पानी/नारियल पानी का सेवन करें दोपहर (12 से 4 बजे) के बीच बाहर निकलने से बचें। चक्कर, सिरदर्द या मतली होने पर चिकित्सकीय परामर्श लें सतर्क रहें, सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करें।


