गरियाबंद

पूर्वजों की स्मृति में भागवत कथा, भक्त उमड़े
16-Apr-2026 4:25 PM
पूर्वजों की स्मृति में भागवत कथा, भक्त उमड़े

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

छुरा, 16 अप्रैल। छुरा विकासखंड के ग्राम खड़मा में धनश्याम सावित्री देवी सिंहा द्वारा अपने पूर्वजों की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का पांचवां दिन भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। कथा व्यास पंडित पुष्कर प्रसाद तिवारी ने समुद्र मंथन की कथा और भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का सजीव वर्णन कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। पारायण कर्ता के रूप में पंडित आशुतोष तिवारी, लोहरसिंग वाले ने कथा का वाचन किया।

कथा के दौरान व्यास जी ने बताया कि किस प्रकार देवताओं और दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया, जिसमें 14 रत्नों की प्राप्ति हुई और भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। मंथन से निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण कर नीलकंठ कहलाए। कथा सुनकर श्रोताओं ने हर-हर महादेव के जयकारे लगाए। इसके पश्चात भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा का वर्णन किया गया। जैसे ही कथा में मध्यरात्रि को वासुदेव-देवकी के पुत्र के रूप में श्रीकृष्ण के अवतरण का प्रसंग आया, पूरा पंडाल ‘नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष से गूंज उठा। आयोजक परिवार द्वारा भगवान के जन्मोत्सव पर भव्य झांकी सजाई गई और पंजीरी-चरणामृत का प्रसाद वितरित किया गया। कथा श्रवण करने ब्रह्माकुमारी अंशु दीदी एवं भाजपा नेत्री व जिला पंचायत सदस्य शिवांगी चतुर्वेदी भी पहुंचीं। उन्होंने कथा की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन से गांव में सकारात्मक ऊर्जा और सामाजिक समरसता का संचार होता है।

आयोजक परिवार के सदस्य प्रकाश सिंह ने बताया कि उनके पूर्वजों की यह इच्छा थी कि गांव में धार्मिक आयोजन हो, उसी संकल्प को पूरा करने के लिए 9 दिवसीय भागवत कथा का आयोजन किया गया है। कथा का समापन 18 अप्रैल को हवन, पूर्णाहुति एवं भंडारे के साथ होगा। सिंहा परिवार के वरिष्ठ हेमलाल सिंहा, खेमलाल सिंहा, सोहन लाल सिंहा परीक्षित के रूप में कथा श्रवण कर धार्मिक अनुष्ठान में शामिल हैं। इस अवसर पर ग्राम के सरपंच, पंचगण सहित पूर्व जनपद सदस्य लगनी अवध राम साहू, पूर्णिमा प्रेमा राम कंवर, शिक्षक चिंताराम सिंहा, देवापी सोनी, ललित भागवत, गोविंद यादव, पिलूराम यादव, तेजस्वी यदु, भानु प्रताप साहू, हेमलाल ध्रुव सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।

कथा का समय प्रतिदिन प्रात: 10 से दोपहर 1 बजे व दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक निर्धारित है।


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