गरियाबंद
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
नवापारा राजिम, 15 अप्रैल। स्थानीय नेहरू बाल उद्यान वरिष्ठ नागरिकों की सुबह शाम की सैर एवं आपस में रोज मिलने जुलने का एक अच्छा ठौर ठिकाना है, प्रतिदिन आने वाले लोगों का एक ग्रुप सहज ही बन गया है, जिसे इन लोगों ने नाम दिया है, मॉर्निंग मस्ती ग्रुप।
इस ग्रुप में नगर के वरिष्ठ बुद्धिजीवी एवं अन्य प्रबुद्ध लोग जुड़े हुए हैं, जो प्रतिदिन मिलते हैं उनके बीच देश दुनिया की सामयिक चर्चा तो होती ही है,साथ ही हंसी ठिठोली के पल भी वे खोज ही लेते हैं, स्वस्थ समय बिताने का यह अच्छा तरीका भी है, सप्ताह में एक बार संगीत की महफिल भी जमती है और गाना बजाना भी होता है, ग्रुप के वरिष्ठ सदस्य अशोक गंगवाल ने बताया कि इस बार हमारे सदस्य प्रेम साधवानी,जो कि रायपुर ग्रामीण क्षेत्र के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के संयोजक भी हैं, की पहल पर रेल से रायपुर जाने और वापस आने का कार्यक्रम बना। रविवार की सुबह की रेल से जाना और सुबह ही वापस आना था,यह यात्रा हम सभी के लिए यादगार रही। प्रेम साधवानी ने बताया कि वस्तुत: यह संगीतमय रेल यात्रा बन गई,3 घंटे के सफर में सभी सदस्यों ने सदाबहार पुराने फिल्मी गानों को सुनाकर सभी का मन जीत लिया, रेल में यात्रा कर रहे अन्य यात्री गण भी अपने आपको रोक न सके और आकर जुट गए, किसी के पैर थिरक रहे थे, तो कोई खुलकर नाच रहा था, कोई तालियां बजाकर उत्साह वर्धन कर रहा था, तो कई लोग तो इन मधुर क्षणों को अपने मोबाइल में वीडियो बना कर सहेज रहे थे, अशोक गंगवाल, प्रेम साधवानी और ब्रह्मदत्त शर्मा के सुरीले गीतों ने वो समां बांधा कि लोग अपने पुराने दिनों में खो गए। इस ग्रप में डॉक्टर के.आर.सिन्हा,शिव भगवान शर्मा, इशहाक ढेबर, कमलेश साहू, तुकाराम कंसारी, अजय अग्रवाल, दिलीप रावलानी सहित अन्य भी शामिल थे, सुबह 8.30 को रायपुर पहुंचकर स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई 9 बजे की रेल से वापस सभी लोग गाते बजाते हुए सभी नवापारा वापस आ गए, सभी ने समवेत स्वरों से कहा कि यह एक खुशनुमा यादगार अनुभव रहा, इसे हम दोहराते रहेंगे।
सेवा निवृत्त शिक्षक शिव भगवान शर्मा ने कहा कि उम्र के इस पड़ाव में आकर जब सीनियर सिटीजन अकेलापन महसूस करते है,अवसाद में पड़ जाते हैं तब हम जैसे लोगों का यह ग्रुप संजीवनी बूटी का काम करता है। पण्डित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने कहा कि यही तो जीवन जीने की श्रेष्ठ कला है। खुद खुश रहो और लोगों को भी खुशियां देने की वजह बनो, यही तो एक अच्छे इन्सान होने की पहचान है। डॉ. सिन्हा ने कहा कि साथ साथ समूह में रहकर हंसना,बोलना समय बिताना,यात्राएं करना,ठहाके लगाना बेस्ट मेडिसिन है,यह एक अच्छा ट्रीटमेंट है,जिंदादिल स्वभाव के मोहम्मद इशहाक ढेबर गार्डन में ग्रुप के बुजुर्गों और हमखयाल लोगों को जोडक़र रखते हैं, उन्होंने इस प्रोग्राम से जुड़े हुए जरूरी इंतजामात किए।
तुकाराम कंसारी ने भी अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आज के तनाव ग्रस्त युग में अपना और अपनों का खयाल रखने का यह बेहतर तरीका है साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विजय गोयल जी के कार्यकाल में नेहरू बाल उद्यान का रखरखाव अच्छा था, इन दिनों यह ठीक से नहीं हो रहा है,अवांछित लोग यहां आकर अभद्र व्यवहार करते हैं, उनके द्वारा आपस में अपशब्दों का प्रयोग और नशीले पदार्थों का खुले आम प्रयोग हम नागरिकों को असहज कर देता है, स्थानीय प्रशासन को इस तरफ ध्यान देना चाहिए जो लोग संयोग से इस ट्रिप में शामिल नहीं हो सके,उन्होंने ग्रुप एडमिन से जल्द ही अगला प्रोग्राम बनाने के लिए कहा है,नवापारा राजिम के स्टेशन मास्टर ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि रेल यात्रियों की यह एक अच्छी पहल है, इससे रेल से यात्रा करने वालों का उत्साह बढ़ेगा।


