धमतरी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कुरुद, 6 दिसंबर। शासकीय कर्मचारियों की मांग नहीं मानने के चलते सत्तारुढ़ पार्टी को छत्तीसगढ़ में हार का सामना करना पड़ा है। नई सरकार को भी इस बात का ध्यान रखना होगा कि कर्मचारियों को नाराज़ कर कोई सुखी नही रह सकता उक्त बातें शासकीय कर्मचारी संगठनों की ओर से कहीं गई है।
प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के संरक्षक ओपी शर्मा व प्रदेश अध्यक्ष आलोक मिश्रा ने बताया कि हमने बिते 5 वर्षों तक सरकार के घोषणा पत्र में किये वादे पूरे करने की गुहार लगाई लेकिन किसी के कानों में जूं तक नहीं रेंगी। आवेदन, निवेदन, भेंट मुलाकात, अधिवेशन और सम्मेलन कर सरकार तक अपनी बात रखी, लेकिन सत्ता के नशे में चूर भूपेश सरकार द्वारा आंदोलन मे समझौता कराके हड़ताली कर्मचरियों का 5 दिन का वेतन काट दिया गया। संविदा कर्मचारी भी अपने नियमितीकरण की मांग को लेकर हड़ताल पर रहे पर उनको भी नियमित नहीं किया गया। 27 फीसदी वेतन वृद्धि तो की गई लेकिन उसका लाभ स्वास्थ्य कर्मचारियों को आज तक नहीं मिला जिसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ा है।
कुरूद ब्लॉक अध्यक्ष डॉ. क्षितिज साहू का कहना है कि विगत पांच वर्ष तक हमें महंगाई भत्ता के लिए तरसाया गया। जिससे कोरोना योद्धाओं में रोष व्याप्त था। आज तक महंगाई भत्ते एरियर्स राशि का भुगतान नही किया गया, चुनाव से एक दिन पहले स्वास्थ्य विभाग के कर्मचरियों की 24 घंटे की ड्यूटी लगाकर कर्मचरियों के मौलिक अधिकार वोट डालने से वंचित करने की साजिश की गयी, जिससे कर्मचरियों के परिवार वालों मे भारी आक्रोश रहा, जिसकी परिणति छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को सत्ता गंवाकर भुगतना पड़ा।
इसी तरह राजस्व पटवारी संघ के प्रातीय प्रवक्ता वीरेंद्र बैस ने कहा कि कांग्रेस राज में मैदानी कर्मचारी दुर्भावनापूर्ण शिकायत एवं स्थानांतरण के चलते व्यवसाय से अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे थे, महंगाई भत्ता जैसे अपनी जायज़ मांगों को लेकर पंचायत, स्वास्थ्य, शिक्षा, राजस्व, आंगनबाड़ी आदि विभागों के कर्मचारी फेडरेशन के बैनर तले महिने भर से अधिक समय तक आंदोलन करने मजबूर हुए, जिससे लोग परेशान होते रहे लेकिन सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया, नतीजन उन्हें अब पांच साल विपक्ष में बैठना पड़ेगा। समाज के किसी वर्ग को दुखी करके कोई भी सत्ता सलामत नहीं रह सकती ,यह सत्य वर्तमान सरकार को भी याद रखना चाहिए।


