धमतरी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कुरुद, 5 नवंबर। मतदान के दस दिन शेष रहते विधानसभा चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों ने जनसंपर्क में दिन रात एक कर दिया है, लेकिन गांवों में अभी धान कटाई और मिंजाई का काम युद्धस्तर पर जारी है। इसलिए उनका संपर्क मतदाताओं से गांव घर में नहीं हो पा रहा है। प्यासा ही कुएं के पास जाता है, इस युक्ति पर अमल करते हुए होशियार प्रत्याशी अब खेत खलिहानों तक जाकर लोगों से मेलजोल बढ़ा रहे हैं।
कुरुद विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के तौर पर छठवीं बार चुनाव लड़ रहे अजय चन्द्राकर अपने ख़ास अंदाज़ में लोगों के बीच जाकर अपनी बात रख रहे हैं। पंद्रह साल बनाम पांच साल का तुलनात्मक विश्लेषण कर वें क्षेत्र के चौमुखी विकास के लिए फिर से आशीर्वाद मांग रहे हैं। ढाई दशक की राजनीति में अर्जित जनपुंजी का लाभ उन्हें गांवों में होने वाले स्वागत सत्कार के रूप में मिल रहा है।
पूर्व मंत्री को अपने बीच पाकर कोई उन्हें खूर्मी पहना रहा है तो कोई उन पर फूल बरसा रहा है। गांव में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो विधायक से प्रति एकड़ धान उत्पादन का गणित समझने को आतुर है, लेकिन भीड़भाड़ के चलते उन्हें मौका नहीं मिल पा रहा है।
इसी तरह जिला पंचायत सभापति एवं कांग्रेस प्रत्याशी तारणी नीलम चन्द्राकर भी अपनी सखी सहेलियों के संग अल सुबह से देर शाम तक गांव की गली से लेकर खेत खलिहानों की पगडंडी नाप रही है। शनिवार को अपने निर्वाचन क्षेत्र के चर्रा, मोंगरा, बानगर,कातलबोड आदि गांवों के दौरे पर निकली। लेकिन कटाई मिंजाई का सीजन होने से मतदाता गांव घर से अधिक खेत खलिहानों में व्यस्त हैं।
मौके की नजाकत को समझते हुए वें खेतों में जाकर ग्रामीण महिलाओं का धान कटाई में हाथ बंटाने लगी। खेतिहर मजदूरों से हंसी ठिठोली के बीच वें अपने लिए आशीर्वाद मांग रही हैं। जनसंपर्क के दरम्यान उन्हें भी मोदी की गारंटी और भूपेश पर भरोसा जैसे सवालों से जूझना पड़ रहा है।
इन दो प्रमुख उम्मीदवारों के अलावा अभी किसी अन्य प्रत्याशियों की हलचल उतनी नजऱ नहीं आ रही है, शायद संसाधन के अभाव में वे चुनाव के और करीब आने का इंतजार कर रहे हो।


