धमतरी

पिछड़े ग्रामीण क्षेत्र के गरीब पालकों ने 17 स्कूलों में स्मार्ट क्लास बना दिया
25-Oct-2023 7:15 PM
पिछड़े ग्रामीण क्षेत्र के गरीब पालकों ने 17 स्कूलों में स्मार्ट क्लास बना दिया

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

नगरी, 25 अक्टूबर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 जब से आई है तब से कई नए नए अनुकरणीय काम शिक्षा विभाग में हो रहे हैं । शासन की मंशा भी यही है कि विद्यालय और पालक मिल जुलकर बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए सतत नवाचारी प्रयास करें। दोनों के साझा प्रयास से ही गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा सम्भव है।

स्वामी आत्मानन्द उत्कृष्ट विद्यालय सिंगपुर मगरलोड के अंतर्गत दो संकुल में इसी दिशा में तेजी से काम हो रहा है। स्कूल काम्प्लेक्स की अवधारणा के अनुरूप एजेंडों के साथ अकादमिक बैठक।

शैक्षिक समीक्षा,गुड प्रैक्टिस का साझाकरण, ग्रेड निर्धारण कर गुणवत्ता सुधार जैसे कार्य इस संकुल में जारी है।

अब संकुल प्राचार्य डॉ व्ही पी चन्द्रा के मार्गदर्शन में संकुल सिंगपुर एवं खड़मा के सत्रह प्राथमिक एवं मिडिल स्कूल में समुदाय के सहयोग से स्मार्ट टीवी की व्यवस्था कर स्मार्ट कक्षा की स्थापना की गई है।

इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए संकुल स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई। दोनों संकुल के शिक्षकों ने एकमतेन इस बात को समझा कि टेक्नोलॉजी के युग में बच्चों को तकनीक के माध्यम से अच्छी शिक्षा जरूर मिलनी चाहिए। फिर क्या हर गाँव में बैठकें हुई। शिक्षकों ने पालकों के समक्ष विषय को रखा गया और देखते ही देखते सत्रह गाँव के गरीब पालक अपने बच्चों की बेहतरी के लिए केवल एक सप्ताह में स्मार्ट टी व्ही की व्यवस्था कर दिए।

संकुल मुख्यालय सिंगपुर में आचार संहिता को ध्यान में रखकर एक भव्य गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन प्रकाश राय प्राचार्य डाइट नगरी के मुख्य आतिथ्य,लक्ष्मण राव मगर सहायक संचालक की अध्यक्षता एवं जोहन नेताम व्याख्याता डाइट नगरी,रंजीता साहू शिक्षिका मिडिल स्कूल लुगे एवम नन्द कुमार साहू के विशिष्ट आतिथ्य में सम्पन्न हुआ।

इस कार्यक्रम में संकुल के प्राचार्य ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के परिप्रेक्ष्य में संकुल के विजन को रखते हुए कहा कि बच्चों के सीखने सिखाने में सीखने के प्राचीन तौर तरीकों के साथ टेक्नोलॉजी को भी जोडऩे की जरूरत है अन्यथा इसके बिना बच्चे वर्तमान ज्ञान की परंपरा से वंचित हो सकते हैं।

प्राचीन संवाद, परामर्श, तर्क, जिज्ञासा, प्रश्नोत्तर शैली के साथ साथ बच्चों को सक्षम बनाने वहेतु खोजी प्रवृत्ति को विद्यालयों में विकसित करने की जरूरत है ताकि बच्चे खुद सवाल कर खुद उसका समाधान निकालें।

कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथियों ने जहाँ इस पहल एवम आयोजन को जिले के लिए अनुकरणीय बताया वहीं मुख्य अतिथि ने इस पहल को भविष्य के लिए आवश्यक पहल बताया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में लक्ष्मण राव मगर ने कहा कि अब ग्रामीण क्षेत्र के पालकों में भी शिक्षा के प्रति जागरूकता आई है जिसका परिणाम यह स्मार्ट कक्षा है।

अब शिक्षकों का दायित्व बढ़ गया है कि पालकों द्वारा उपलब्ध संसाधनों का ज्यादा से ज्यादा रचनात्मक उपयोग कक्षा में हो। इस बात के लिए सभी शिक्षकों ने बेहतर कार्य करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर दोनों संकुल के समस्त व्याख्याता, प्रधान पाठक एवम शिक्षक उपस्थित थे।


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