धमतरी

कौमी एकता का प्रतीक नगरी का नवदुर्गा व विजयदशमी महोत्सव
16-Oct-2023 3:56 PM
कौमी एकता का प्रतीक नगरी का नवदुर्गा व विजयदशमी महोत्सव

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

नगरी, 15 अक्टूबर। नव आनंद कला मंदिर नगरी के तत्वाधान में प्रति वर्ष कौमी एकता का प्रतीक नगर स्तरीय नवदुर्गा एवं विजयदशमी महोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। समिति के सचिव नरेश छेदैहा ने आदर्श आचार संहिता के दिशा निर्देशों पालन करते हुए 15 अक्टूबर से प्रारंभ हो रहे नवरात्रि महोत्सव की जानकारी देते हुए कहा कि नगर में विगत 72 वर्षों से केवल एक ही स्थान राजा बाड़ा गांधी चौक पर माता रानी का आकर्षक व अद्भुत पंडाल सजाया जाता है।

इस आयोजन के प्रति लोगों के मन में गजब का उत्साह रहता है। इसे सभी जाति और धर्म के लोग एक साथ मिलकर मनाते हैं। इसे नगरी की कौमी एकता और भाईचारा के मिसाल के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इसका शुभारंभ माता रानी की विशाल शोभा यात्रा के साथ होता है। शोभा यात्रा नगर पंचायत नगरी से कार्यक्रम स्थल राजाबाड़ा तक निकली जाती है।

इस अवसर पर नई बस्ती माता सेवा दल नगरी और पुरानी बस्ती माता सेवादल नगरी के भक्तों द्वारा सुर ताल ढोल व मंजीरे के बीच जस गीत के माध्यम से माता रानी की महिमा की अद्भुत रचना की है। शोभा यात्रा का नजारा अद्भुत आकर्षण व विहंगम होता है। इसमें महिलाएं कलश धारण कर अटूट सहभागिता प्रदान करती हैं। शोभायात्रा में डीजे की भी व्यवस्था होती है। कभी कभी नर्तक दल भी भाग लेते हैं। नगरी के सभी इसमें शामिल होकर भाईचारा के समागम का रूप देते हैं। नवरात्रि में नगरी के गांधी चौक पर प्रतिमा स्थापना के साथ 9 दिनों तक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी होता है। इस दिन नगर के किसी वार्ड या मोहल्ले में कोई भी सार्वजनिक या व्यक्तिगत आयोजन नहीं होता। माता रानी की प्रतिमा के समक्ष प्रतिदिन नई बस्ती माता सेवा दल नगरी और पुरानी बस्ती माता सेवा दल नगरी के द्वारा ढोल मंजीरा और करतल ध्वनि के बीच जस गीत के माध्यम से माता रानी की महिमा की अद्भुत रचना की जाती है।

इस अवसर पर कार्यक्रम स्थल पर स्थित ऐतिहासिक दंतेश्वरी मंदिर के ज्योति कक्ष में भक्तों की मनोकामना ज्योति प्रज्वलित किए जाते हैं। नगर पुरोहित द्वारा प्रतिदिन माता रानी की पूजा अर्चना की जाती है इस आयोजन में नगरी के भाईचारा के प्रतिक श्री राम नव युवक परिषद नगरी की सभी 14 रामायण मंडलियां बढ़ चढक़र भाग लेती है। इस महती आयोजन में व्यवसायी वर्ग कर्मचारी वर्ग, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तथा पुलिस प्रशासन का योगदान रहता है।

इस आयोजन का लोग साल भर बड़ी बेसब्री से प्रतीक्षा करते हैं इस वर्ष नवरात्रि के अद्भुत पल को संजोकर रखने के लिए दो सेल्फी जोन स्थापित किए गए हैं। कार्यक्रम स्थल पर सीसी कैमरे लगाए गए हैं। मुख्य मार्ग में दर्जनभर स्वागत द्वार बनाए गए हैं। जिसे बिजली की लडिय़ों से जगमगाया गया है। समिति के पदाधिकारियों द्वारा कार्यक्रम की व्यापक तैयारियां की गई है।

पूजा में बेवा छेना का उपयोग

नगरी में मनाए जाने वाली नवरात्रि महोत्सव पर माता रानी की पूजा में बिनवा छेना का उपयोग होता है। दशांक और धूप की आहुति के लिए बिनवा छेना में आज प्रज्वलित की जाती है। बिनवा छेना अर्थात प्राकृतिक रूप से बना हुआ कंडा। इसका अर्थ यह भी होता है कि खेत खलिहान में पड़े गोबर पड़े पड़े सूख जाते हैं गोबर के इसी सूखे हुए रूप को बिन लिया जाता है। इस कारण इसे बिनवा छेना कहा जाता है। यह परंपरा 2023 की स्थिति में 73 साल पुरानी है जो आज भी कायम है।

चकमक पत्थर से ज्योति प्रज्वलित करने की परंपरा

नगरी में नवरात्रि महोत्सव पर पत्थर से आग उत्पन्न कर मनोकामना ज्योति प्रज्वलित करने की अनोखी परंपरा है। यहां की परंपरा के अनुसार चकमक पत्थर से आज उत्पन्न कर ज्योति प्रज्वलित करने की अद्भुत परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इसके लिए एक विशेष प्रकार का पठार जंगल से लाया जाता है। इस पत्थर में आज की चिंगारी उत्पन्न होने की उत्तेजक क्षमता पाई जाती है। इस पत्थर को चकमक पत्थर कहा जाता है। विशेष प्रकार के लोहे से पत्थर पर प्रहार करके चिंगारी निकल जाती है।

 इसके लिए एक बांस की छोटी सी ढोलकी में सेमर पेड़ की हुई भर कर रखा जाता है हुई वाली ढोलकी और पत्थर को एक साथ एक ही हाथ में पकड़ ने का तारिक गजब का होता है। ऐसा पकड़ा जाता है कि दूसरे हाथ से पत्थर पर प्रहार करने से निकली चिंगारी रुई पर ही पड़ती है और उसमें आग प्रज्वलित हो जाती है। इसी आग से नवरात्रि की मनोकामना ज्योति प्रज्वलित की जाती है। इसी आज का उपयोग चूल्हा में भोजन बनाने के लिए उपयोग होता है।


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