धमतरी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कुरुद, 3 अक्टूबर। दो अक्टूबर गांधी जयंती के दिन सरकार स्वच्छता दिवस के तौर पर मना रही है, सामाजिक संस्थाएं भी इसमें सहभागिता दर्ज कर साफ सफाई की हिमायती बन खुद के प्रचार-प्रसार में लगी हैं। लेकिन नगर से थोड़ी दूरी पर स्थित डंपिंग ग्राउंड के आस पास रहने एवं गुजरने वालों के लिए नगर में लगने वाले स्वच्छता के नारे बेमतलब ही सिद्ध हो रहें हैं, उनकी समस्या आज भी जस के तस कायम है।
ज्ञात हो कि कुरुद नगर पंचायत में हर रोज कई ट्रेक्टर कचरा निकलता है। जिसे 2 किमी दूर कन्हारपुरी,भूसरेंगा रोड में बने डंपिंग ग्राउंड में फेंक दिया जाता है। बरसात में कचरा सडऩे की बदबू से कन्हारपुरी वासियों एवं इस मार्ग से होकर गुजरने वाले लोगों का बूरा हाल हो रहा है। भुसरेंगा के प्रगतिशील कृषक हर्षवर्धन चन्द्राकर ने बताया कि नगर की गंदगी को रोज यहां लाकर डाल दिया जाता है, पॉलीथिन उडक़र कई किमी दूर जाकर खेत को बंजर बना रही है, बरसात में सडऩ और गर्मी में उठता धुआं क्षेत्रीय लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल रहा है।
कन्हारपुरी के लोकेश्वर, दीपक, कमलेश, राजेन्द्र आदि ग्रामीणों ने बताया कि इस जगह को जब कचरा संग्रहण के लिए चयनित किया गया था, तब हम लोगों ने इसका विरोध किया था, लेकिन जनप्रतिनिधियों ने हमारी बात नहीं सुनी। जिसका खामियाजा क्षेत्रवासी भुगत रहे हैं।
विनय, चुरामन, सागर, गंगाराम का कहना है कि खुले में फेंके गए कचरा खाने से अब तक कई गायों की मौत हो गई है, कहने को कचरा से खाद बनाने के लिए यहाँ पर लाखों की लागत से रीसाइकल फैक्टरी लगाईं गई है, जो अक्सर बंद ही रहती है। क्षेत्र के कुछ जागरूक लोगों का सुझाव है कि जनप्रतिनिधि ध्यान दें तो इस जगह को कचरे का पहाड़ बनाने की जगह अंबिकापुर और बिरगांव की तरह फूलों का बगीचा बनाया जा सकता है। इसी तरह कुरुद के राइस मिलों से फैलते प्रदूषण को लेकर भी नागरिकों में आक्रोश व्याप्त है।
इस बारे निकाय अधिकारी का कहना है कि लोगों की शिकायत का हल निकालने जनप्रतिनिधियों से बात की जाएगी।


