धमतरी

सामाजिक नियम का पालन कर जन्मदिन पर नहीं काटा केक
14-Jul-2023 3:22 PM
सामाजिक नियम का पालन कर जन्मदिन पर नहीं काटा केक

  धमतरी जिला साहू समाज ने बनाया नया नियम  

कुरुद, 14 जुलाई। कहते हैं कि नियम बनाना आसान है, पर उस पर अमल करना मुश्किल होता है। परंतु समाज में कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो तय नियमों को अपने आचरण में ढाल औरौं के लिए मिशाल बनते हैं। ऐसा ही एक उदाहरण प्रदेश साहू संघ उपाध्यक्ष ने अपने पुत्र के जन्मदिन पर पेश किाया। जहां पहली बार बिना केक काटे  बर्थडे मना साहू समाज द्वारा बनाए गए नियम के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।

गौरतलब है कि 9 जुलाई को धमतरी जिला साहू संघ द्वारा आहुत सामाजिक कार्यशाला में समस्त तहसील एवं परिक्षेत्र अध्यक्ष, जिला पदाधिकारियों की उपस्थिति में एक जिला एक समान नियम का संकल्प लिया गया। आम राय से तय नियमावली में समाज में व्याप्त कुरीतियों, विकृतियों एवं आडंबर पर रोक लगाते हुए सनातन संस्कृति के अनुरूप सभी संस्कार पुरे करने का निर्णय लिया गया। जिसमें जन्मदिन, सगाई, विवाह एवं अन्य सभी कार्यक्रमों पर केक काटना प्रतिबंधित किया गया था।

इस फैसले के चार दिन बाद प्रदेश साहू संघ उपाध्यक्ष मालकराम साहू के डॉ. बेटे क्षितिज साहू का जन्मदिन आया, इसके पूर्व गीत संगीत,मौज मस्ती के साथ केक काट कर बेटे का बर्थडे मनाने वाले साहू परिवार ने इस बार समाजिक नियम के तहत सादगी से जन्मदिन मनाया। जिसमें पेशे से शासकीय चिकित्सक पुत्र ने कुल देवी की पूजा-अर्चना कर बड़ों के पैर छुए और सबसे आशीर्वाद लिया। 

परिवार के इस फैसले से इस बार नाच-गाना, पार्टी-शार्टी फोटोशूट नहीं होने से युवा मित्र मंडली को थोड़ा निराशा हुईं। उनका मानना है कि प्री वेडिंग, सगाई, शादी से जुड़े नियमों के बदलाव ठीक है, लेकिन किसी का बर्थडे पूरे परिवार के लिए खुशियों की सौगात लेकर आता है, इससे जीवन की यादें जुड़ी होती है, इस नये नियम को छोटे बच्चों के लिए शिथिल किया जाना चाहिए। 

इस बारे में छत्तीसगढ़ साहू संघ उपाध्यक्ष मालकराम का कहना है कि समाज सर्वोच्च होता है। समाजिक बदलाव की पहल हमेशा ऊपर से नीचे की ओर हो, तभी नियम लागू होते हैं। यही सोच कर मैंने अपने घर से ही इसकी शुरुआत की है। नई पीढ़ी की भावनाओं को उचित फोरम में रखकर इसमें विचार किया जा सकता है।

बहारहाल जिला साहू समाज द्वारा तय नियमावली का समर्थन करते हुए जिला उपाध्यक्ष गौकरण साहू, तहसील अध्यक्ष राधेश्याम,कामता साहू, उपाध्यक्ष रमेशर साहू, मनीष, प्रमोद साहू ने बताया कि पाश्चात्य सभ्यता के प्रभाव से हमारे समाज में भी विकृत आ रही थी, जिस पर विचार कर नया नियम बनाया गया है। अब सगाई में केवल अंगूठी रस्म होगा, जय माला पहनाना, केक काटना मंगलसूत्र व अन्य गहना देना प्रतिबंधित कर विवाह में कपड़ा बांटना बंद किया गया है। शांति भोज में केवल चावल, दाल, सब्जी ही परोसी जाएगी। 

राजिम भक्तिन माता महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष शारदा लोकनाथ साहू, शकुन्तला, गायत्री, मंजू, सुमन साहू आदि महिलाओं ने प्री वेडिंग फोटोशूट, शॉपिंग में प्रतिबंध, जयमाला के समय वर-वधू का नाचना और जीजा की गोद में साली को बिठाना, शोकाकुल परिवार में विधवा माता का चूड़ी उतारने का कार्य घर में किया जाना, विधवा महिलाओं को सभी मांगलिक कार्यक्रमों में शामिल होने का अधिकार जैसे नियम बदलने का स्वागत करते हुए कहा कि विधवा विवाह को आदर्श विवाह के रूप में मान्यता देने, समाजिक बैठकों में महिलाओ की सहभागिता सुनिश्चित करने के फैसले से नारी शक्ति का मान बढ़ाया है। 

कुरुद तहसील युवा साहू समाज अध्यक्ष देवव्रत साहू, कृष्णकांत, डुमेश, टिकेश साहू आदि युवाशक्ति ने भी नियमावली का समर्थन करते हुए कहा कि विवाह में जूता छिपाने का नेग में रोक लगाने, प्रत्येक गांवो मे महिला एवं युवा प्रकोष्ठ का गठन से नई पीढ़ी को समाज से जुड़ाव बढ़ेगा और समाज को संगठित करने में मदद मिलेगी।


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