धमतरी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
नगरी, 13 जुलाई। सर्व आदिवासी समाज ने यूसीसी के विरोध में अनुविभागीय कार्यलय नगरी में अनुविभागीय अधिकारी गीता रायस्त को ज्ञापन सौंपा। बता दें कि समान नागरिक संहिता में सभी धर्मों के लिए एक कानून की व्यवस्था होगी. हर पंथ का पर्सनल लॉ है, जिसमें शादी, तलाक और संपत्तियों के लिए अपने-अपने कानून हैं। यूसीसी के लागू होने से सभी धर्मों में रहने वालों लोगों के मामले सिविल नियमों से ही निपटाए जाएंगे। कुछ दिन पूर्व पिछड़ा वर्ग समाज के द्वारा भी विरोध दर्ज कराया जा चुका है क्षेत्र के समस्त मूलनिवासी समाज इसके विरोध में हैं।
इसी कड़ी में सर्व आदिवासी समाज नगरी द्वारा भी इस काले कानून का विरोध किया गया। समाज ने कहा आदिवासियों के पास कोई संहिताबद्ध कानून नहीं है। आदिवासी समुदाय जन्म, तलाक, विभाजन, उत्तराधिकार, विरासत, भूमि और संपत्ति के मामलों में अपने पारंपरिक कानूनों द्वारा शासित होता है और यही इसकी पहचान है, जो बाकी जातियों से अलग है। हमारी अपनी संस्कृति, परम्पराये हैं और यूसीसी के कारण इसके प्रभावित होने की संभावना है। इस अवसर पर उमेश देव अध्यक्ष आदिवासी समाज,रामप्रसाद मरकाम, आर.एल देव, शशि ध्रुव, प्रमोद कुंजाम, संतकुमार नेताम, हलधर शार्दूल, हिर्दय नाग,नेमीचंद देव, माखन ध्रुव, हेमलाल मरकाम, टेश्वर ध्रुव, श्रीधन सोम, दीपेश नाग, फुलेश्वरी नेताम, पुष्पाबाई ध्रुव, हेमन्त तुमरेटी, टिकेश नेताम, नवीन गौर,सुरेश सोम, आसत समरथ आदि उपस्थित थे।


