धमतरी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
नगरी, 8 जनवरी। जि़ला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान नगरी में नगरी नगर के प्रिंट मीडिया एवं इलेक्ट्रॉनिक मिडिया कर्मियों की उपस्थिति में डाइट में अध्ययनरत डी एल एड के छात्राध्यापक एवं भावी शिक्षकों ने संभाषण कौशल के गुर को सीखा समझा।
ज्ञात हो कि नई शिक्षा नीति 2020 में सम्प्रेषण कौशल पर बहुत ज्यादा जोर देते हुए कहा गया है कि बच्चे जिन बातों को जानते समझते हैं उसे अभिव्यक्त करें। संवाद न कर पाने की स्थिति में बच्चे शिक्षकों से जुड़ भी नहीं पाते। बच्चों में अभिव्यक्ति कौशल का विकास तभी हो पायेगा जब शिक्षक में यह कौशल मौजूद हो। डी.एल.एड. के छात्राध्यापक इंटर्नशिप के लिए विद्यालय जाते हैं और बच्चों से सीधे उनका जुड़ाव होने के लिए यह कौशल जरूरी है। इसी बात को ध्यान में रखकर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। चूंकि यही छात्राध्यापक कल शिक्षक बनेंगे इसलिए इनमें अभिव्यक्ति कौशल का विकास जरूरी है ताकि इस गुण का विकास बच्चों में कर सकें।
इस कार्यक्रम में नगरी अंचल के मीडिया कर्मियों ने छात्राध्यापकों को लिखित एवम मौखिक दोनों अभिव्यक्ति कौशल की बारीकियों से विभिन्न उदाहरणों से अवगत कराया।
संस्था के प्राचार्य डॉ व्ही पी चन्द्रा ने आधार बीज वक्तव्य देते हुए स्वामी विवेकानन्द एवं डेल कार्नेगी की वाकपटुता एवं कथन शैली से अवगत कराया।उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति कौशल दुनिया की बहुत बड़ी कला है जिसके बलबूते इंसान आगे बढ़ता है। किसी की बातों से लाखों लोग जुड़ जाते हैं और कोई 10 -20 लोगों को भी प्रभावित नहीं कर पाते।।सही तथ्यों को विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से कम से कम शब्दों में रखना ही सही अभिव्यक्ति कौशल है। इसके लिए विद्यालयों में बच्चों को ज्यादा से ज्यादा अवसर देने चाहिए। समूह में चर्चा का अवसर देने से भी यह कला निखरती है।
युवा पत्रकार दीपेश निषाद द्वारा प्रेस का अर्थ बताते हुए पत्रकारिता धर्म के निर्वहन में सम्प्रेषण कौशल की महत्ता को प्रतिपादित किया हैं और यही गलतियां सीखने की सीढ़ी बनती है। अत: गलतियों से आगे बढ़ते जाना ही हमारा दायित्व होना चाहिए। आज के बच्चों में इस कौशल का विकास इसलिए नहीं हो रहा है कि बच्चे संयुक्त परिवार से दिनों दिन कट रहे हैं । पहले दादा दादी ,चाचा चाची के बीच रहकर खूब बात करते थे लेकिन एकल परिवार की धारणा ने इस पर विराम लगा दिया जिसके कारण बच्चे अपनी बातों को अभिव्यक्त नहीं कर पाते।
वरिष्ठ पत्रकार जीवन नाहटा द्वारा लिखित अभिव्यक्ति कौशल पर विशेष जोर देते हुए छात्राध्यापकों को सम्बोधित कर कहा कि लिखने की आदत से न केवल लिखावट सुधरती है अपितु मौखिक अभिव्यक्ति के लिए सामग्री भी तैयार होती है। बार बार के अभ्यास से इसे प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने दिमाग को ठंडा रखकर बोलने और लिखने पर जोर देते हुए।
वरिष्ठ पत्रकार अशोक संचेती के द्वारा कहा गया कि अभिव्यक्ति कौशल के लिये सबसे पहले सुनने एवं पढऩे का कौशल विकसित करना जरूरी है। दूसरों की बातें एवम लिखित सामग्री का अध्ययन से बहुत सारी बातें सीखी जा सकती हैं। अच्छी बातों को सीखना अच्छी आदत है। सुनने एवम पढऩे के बाद चिंतन मनन कर अपनी भावनाओं को सारगर्भित सहज शब्दों में अपने विचारों को अभिव्यक्त करने से ही लोगों को प्रभावित किया जा सकता है।
नगरी नगर के कवि युगल किशोर सोनी के कविता के माध्यम से अभिव्यक्ति कौशल को बताते हुए कविताएं सुनाई।
अंत में सहायक प्राध्यापक पी एस राय ने उद्बोधन में कहाआजकल शब्दों का कमाल है कहां पर किस शब्द का प्रयोग करना है वह हमारे ऊपर होना चाहिए साथी कौशल का विकास शब्द से ही होता है एक सफल व्यक्ति बनने के लिए शब्दों का ही प्रयोग करना पड़ता है।
साथ ही आजकल नैतिक विकास का पतन हो रहे इसके बारे में आजकल जानना जरूरी हैआज प्राचीन काल में .माता पिता बेटी के बारे में कविता के माध्यम बताया कि मातृशक्ति से घर संसार बसते हैं मातृशक्ति सिंह होता है राष्ट्र का उद्धार मातृशक्ति से से प्राचीन का विकास होता है मातृशक्ति से संस्कृति पढता है मातृशक्ति के बौदिक विकास होता मातृशक्ति से नैतिक विचार उत्पन्न होते हैं मातृशक्ति से भक्ति मिलती है मातृशक्ति से शक्ति मिलती हैमातृशक्ति से बसते है घर संसार अधिक जानकारी देते हुए कार्यक्रम का समापन किया ।
इस अवसर पर सहयक प्राध्यापक डी के साहू पत्रकार अभिनव अवस्थी,कुलदीप साहू,राजशेखर नायर, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से धर्मेंद्र यादव सहायक प्राध्यापक के एस ध्रुव, डाइट नगरी के व्याख्याता बी एम गजेंद्र, हिममणि सोम, एस के बैरागी नरेंद्र देवांगन जोहन नेताम संगीता रनघाटी सहित, डाइट नगरी के प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के छात्राध्यापक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन जोहन नेताम व्याख्याता डाइट नगरी द्वारा किया गया।


