धमतरी
अधिकांश फ़सल चक्र परिवर्तन के पक्ष में
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कुरुद, 10 दिसंबर। सरकार ने इस बार गंगरेल बांध से रबी फसल के लिए पानी नहीं देने का ऐलान किया है। जल उपयोगिता समिति के इस फैसले का कुछ किसानों ने स्वागत किया है तो कुछ ने निराशा जताई है।
गौरतलब है कि धमतरी जिला के सभी बांध इस बार लबालब है, जिससे उम्मीद थी कि सरकार रबि के लिए नहरों में पानी छोड़ेगी। लेकिन प्रशासन ने डेम मरम्मत कार्य का हवाला देकर पानी देने से मना कर दिया। सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए ग्राम भरदा के किसान लेखराम चन्द्राकर का कहना है कि खेतों में लगातार धान की फसल लेने से जमीन की उर्वरा शक्ति घटती है, तेज़ धूप में पसीना बहा कर तैयार फसल को व्यापारी औने-पौने में खरीदते हैं, खुले बाजार में हमें मेहनत और लागत का वाजिब दाम नहीं मिलता। इससे अच्छा किसान भाई दलहन तिलहन का उत्पादन करें, ताकि हमें आयात पर निर्भर न रहना पड़े।
चरमुडिय़ा के कौशल पटेल का मानना है कि बांधों में पर्याप्त पानी भरा है तो फसल के लिए देना चाहिए, अगली बारिश में यह पानी बर्बाद ही होगा। रबि फ़सल लेने से किसानों को अतिरिक्त आमदनी हो जाती है, जिससे बाजार में हलचल होती है, जिसका असर इकोनॉमी में पड़ता है।
बगदेही के रामचंद्र साहू ने सरकार के पानी नहीं देने के फैसले को सराहनीय कदम बताते हुए सभी किसानों को फसल चक्र परिवर्तन के लिए आगे आने का आह्वान किया। उनका कहना है कि मंहगे खाद बीज से तैयार रबि फसल के धान को 13-14 सौ रुपए क्विंटल में बेचने से अच्छा हम अपने खेतों में गेहूं,चना और तिलहन का उत्पादन करें, सब्ज़ी बाड़ी भी अच्छा विकल्प है। फसल चक्र परिवर्तन से पर्यावरण भी सुधरेगा और हम अपनी जरूरत की चीजें पैदा कर महंगाई का मुकाबला कर सकते हैं।
मोंगरा के अम्बेद साहू का कहना है कि सिर्फ पानी देने से कुछ नहीं होता, खाद बीज और समर्थन मूल्य की भी व्यवस्था होनी चाहिए, रबि फसल में हमेशा ही किसानों को कम और व्यापारियों को अधिक फायदा होता है।
दहदहा के किसान डीलन चन्द्राकर ने भी सरकारी फरमान को सहीं ठहराते हुए कहा कि काम के साथ आराम की जरूरत होती है, रबि फसल बोने से खेत और किसानों की सेहत पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, लेबर की समस्या होती है। दलहन तिलहन का उत्पादन नहीं होने से हमें बाजार पर निर्भर होना पड़ता है जिससे महंगाई बढ़ती है। इसी तरह बांध से पानी नही देने पर कई किसान संतुष्ट है तो कुछ ने अपनी नाराजगी जताई है।






