धमतरी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कुरुद, 9 दिसंबर। गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव परिणाम आने के बाद स्थानीय नेताओं की स्थिति न तुम जीते न हम हारे जैसी हो गई है। गुजरात में विधायक अजय चन्द्राकर ने तो अपनी आक्रामक शैली और चुनावी प्रबंधन के बुते अपने प्रभार वाली सीट जीताने में अहम भूमिका निभाई। यही नहीं, कुरूद के मंडी अध्यक्ष नीलम चन्द्राकर हिमाचल में अपने प्रभार वाली सीट तो नहीं जीता सके, लेकिन उन्होंने सह प्रभार वाले मंडी जिले की चार सीटों पर भाजपा को चित कर दिया।
गुरुवार को घोषित दो राज्यों के चुनाव परिणाम ने भाजपा, कांग्रेस सहित आप को भी खुश होने की वजह दी है। गुजरात में भाजपा को मिली एतिहासिक विजय ने पहाड़ी राज्य की हार का ग़म गलत कर दिया। कांग्रेसी नेताओं ने कल बीच बाजार पटाखे फोड़ जता दिया कि उन्हें गुजरात में हुईं फजीहत का उतना मलाला नहीं है, जितनी खुशी रिवाजी राज्य हिमाचल में जीत की है। आम आदमी पार्टी के नेता भी अपने दावों की पोल खुलने की चिंता छोड़ राष्ट्रीय पार्टी बन जाने का मार्ग प्रशस्त होने पर ख़ुश नजऱ आए। अब बात करें हम यहां के दो धाकड़ नेताओं के परफार्मेंस की तो दोनों की झोली में खुिशयां आई है। कुरुद भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर को पार्टी ने गुजरात के नदोड़ विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी डॉ दर्शना देशमुख की नैया पार लगाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। जिस पर वे खरा उतरे। भाजपा प्रत्याशी ने कांग्रेस के हरेश वसावा को 28338 वोटों से हराने में सफल रहे।
दूसरी ओर कांग्रेस ने मंडी अध्यक्ष नीलम चंद्राकर को हिमाचल के सेराज विधानसभा में कांग्रेस प्रत्याशी चेतराम ठाकुर को जिताने की जिम्मेदारी दी थी। लेकिन मुकाबला मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से था, सामने हेवीवेट कैंडिडेट होने से यहां पर भले सफल नहीं हो पाए, लेकिन अपने सह प्रभार वाले मंडी जिले की 10 मे 4 सीटें भाजपा से छीनने में सफल रहे। ज्ञात हो कि पर प्रदेश में अपने राजनीतिक कौशल का प्रदर्शन कर लौटे कुरुद के ये दोनों नेताओं का सामना पिछले विधानसभा चुनाव में हो चुका है। अब तक की परिस्थितियां इशारा कर रही है कि सबकुछ ठीकठाक रहा तो दस महीने बाद यही दोनों चेहरे फिर आमने सामने हो सकते हैं।



