दन्तेवाड़ा

पुनर्वास नीति से पहुंच रहा विकास- विनोद
09-Apr-2026 10:37 PM
पुनर्वास नीति से पहुंच रहा विकास- विनोद

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

दंतेवाड़ा, 9 अप्रैल। छत्तीसगढ़ शासन की नक्सली पुनर्वास नीति का मिशन आत्मसमर्पित युवाओं का भविष्य तराश  रहा हैं। पुनर्वास नीति से आत्मसमर्पित परिवारों को आत्मनिर्भरता हासिल होगी। इस संबंध में दन्तेवाड़ा के लाईवलीहुड कॉलेज में आत्मसमर्पित युवक युवतियों हेतु जिला प्रशासन द्वारा स्वरोजगार के नये ट्रेंड एवं प्रशिक्षण जारी है।

इसी क्रम में पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित 27 वर्षीय युवा विनोद कुरसम, भी इलेक्ट्रीशियन का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे है। उन्होंने बताया कि वे पांचवी तक ही पढ़ाई कर सके है क्योंकि गांव के स्कूल को नक्सलियों द्वारा वर्षों पूर्व बम से उड़ा दिया गया था।

 

विनोद कुरसम ने बताया कि वह मूल रूप से जिला बीजापुर ब्लॉक भोपालपटनम के दूरस्थ बीहड़ गांव कोकेरा का रहने वाला है। भोपालपटनम से लगभग 60 किलोमीटर दूर ग्राम कोकेरा विकास से पूर्णत: अछूता ग्राम था। जहां न तो बिजली थी न ही सडक़, न स्कूल, न ही अन्य बुनियादी सुविधा थी। यहां की जनसंख्या बमुश्किल 100 के लगभग और परिवार 30-40 के आस पास थे। लोगों को अपनी जरूरी सामग्री हेतु 50 किलोमीटर दूर बरदेली ग्राम जाना पड़ता था, जो राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है।

वर्तमान से 15-16 साल पहले नक्सली गतिविधियों ने यहां डेरा जमा लिया था। निरक्षर ग्रामीणों को जबरदस्ती अपनी विचारधारा मानने के लिए विवश किया जाता रहा। कम उम्र के बच्चों के लिए माओवादियों द्वारा बाल संघम सदस्य बनाया गया था। इस बाल संगठन से विनोद कुरसम 2008-9 से जुड़ गया था। बड़े होने पर उसे नक्सली संगठन  ‘ ‘चैरपल्ली आरपीसी जनताना सरकार’’ का कमांडर बनाया गया था। इस प्रकार उसका मानना है कि  15-16 वर्ष तक असामाजिक गतिविधियों से जुडक़र अपने जीवन के 15-16 वर्ष निरर्थक हो गए।

राज्य शासन की विकास योजनाओं एवं पुनर्वास नीतियों की बदौलत उनका यायावरी जिंदगी से मोह भंग हो गया और 15 जनवरी 2026 का वह दिन भी आया, जब उसने सरकार की  पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर अपने 30 साथियों के साथ जिला बीजापुर में आत्मसमर्पण कर दिया। अब वह अपने जीवन को नया मोड़ देने के लिए दृढ़ संकल्पित है।

विनोद कुरसम  बताते हंै कि उसके परिवार में मां-पिताजी के अलावा पत्नी और उसके क्रमश: 8, 10, 11 साल के तीन लडक़े भी हंै। उसका बड़ा पुत्र ग्राम बरदेली के बालक आश्रम में कक्षा 7वीं में अध्ययनरत है।

अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और एक अच्छा नागरिक बनाने के अपने संकल्प दोहराते हुए वह कहते हंै कि यहां प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद वह अपने गांव के समीप इलेक्ट्रिशियन का व्यवसाय करना चाहेगा। वहीं उसके गांव में भी सडक़ सहित बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही है।


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