वजह- राइस मिलर्स का 46 करोड़ बकाया
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
धमतरी, 23 नवंबर। राइस मिलरों के उठाव के लिए अनुबंध नहीं कराने से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी प्रभावित है। बीते 14 नवंबर से खरीदी शुरू हुई, लेकिन अब तक सभी 100 खरीदी केन्द्रों से एक बोरा भी धान का उठाव नहीं हुआ है। राइस मिलर्स का 46 करोड़ से ज्यादा का बकाया है। इस वजह से कस्टम मिलिंग का विरोध कर रहे है।
जिले में बीते 5 दिनों की खरीदी में 11 हजार 473 किसानों ने अपना धान बेचा है। इसकी मात्रा करीब 4 लाख 92 हजार 227 क्विंटल है। राज्य सरकार ने धमतरी में यह धान करीब 1 अरब 13 करोड़ 58 लाख 74 हजार रुपए की लागत से खरीदा है। 5 दिन की खरीदी के बाद जिले के अधिकांश खरीदी केंद्रों में धान का स्टॉक जाम हो गया है। नगरी के सांकरा और नगरी में बफर स्टॉक हो गया है। 21 नवंबर की स्थिति में जिलेभर में 11 हजार 473 किसानों ने 4 लाख 92 हजार 227 क्विंटल धान बेच चुके थे। जिला विपणन अधिकारी सुनील सिंह राजपूत ने बताया कि जिले में अब तक करीब 5 लाख क्विंटल धान की खरीदी हो चुकी है। उठाव के लिए परिवहन अनुबंध कर आदेश जारी किया जाएगा। फिर संग्रहण केन्द्र भोयना, जंवरगांव के लिए धान का उठाव शुरू होगा। इसके बाद चिटौद, भाठागांव संग्रहण केन्द्र धान पहुंचेंगा।
कस्टम मिलिंग को लेकर विरोध जारी
जिले में कस्टम मिलिंग कार्य को लेकर अभी भी गतिरोध बना हुआ है। कस्टम मिलिंग कार्य करने वाले 98 उसना और 185 अरवा राइस मिल हैं, जिन्हें मिलिंग खाते में अभी भी 46 करोड़ का बकाया है, जिसका भुगतान लटका है। मिलर्स कांग्रेस शासन काल में कस्टम मिलिंग की निर्धारित दर 120 रुपए क्विंटल को अब भाजपा सरकार द्वारा 60 रुपए क्विंटल कर देने से आक्रोश है। इससे नाराज राइस मिलरों ने प्रोत्साहन राशि बढ़ाने व बकाया भुगतान की मांग को लेकर कस्टम मिलिंग कार्य से हाथ खींच लिया है।
प्रोत्साहन राशि 120 रुपए प्रति क्विंटल रखा जाए। 2022-23 की दूसरी किस्त और 2023-24 की पहली किस्त के 60-60 रुपए का भुगतान हो।
2024-25 में प्रोत्साहन राशि का एकमुश्त भुगतान। पूर्व वर्ष का बकाया एफआरके, फोर्टिफाइड राइस कर्नेल, परिवहन, बारदाना और पेनाल्टी की विसंगति पूर्ण कटौती का भुगतान।
मिलर्स चावल जमा करने 7 दिन में विंग्स ऐप में आवेदन करेगा। 20 दिन में चावल जमा करेगा। इसके बाद 5 रुपए प्रति क्विंटल की पेनाल्टी लगे।
मार्कफेड बारदाना उपयोग करने के बाद मिलर्स को वापस करेगा। नहीं लौटाने पर यूटिलिटी चार्ज के साथ बारदाने की कीमत भी देगा।
एसएलसी दर पर धान, चावल परिवहन व्यय का मासिक भुगतान होना चाहिए। एफआरके का लॉट वाइज भुगतान होना चाहिए।
अब तक 10 मामले में 759 क्विंटल धान जब्त
निगरानी समिति की टीम ने अब तक ऐसे 759.6 क्विंटल अवैध धान पकड़ चुके है। 10 मामले में संबंधितों पर कार्रवाई हुई। इसमें एक किसान पर भी कार्रवाई हुई है। 14 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी शुरू हुई। इसके साथ ही जिले के सोसाइटियों में कोचियों और बिचौलियों का धान भी बिकने के लिए पहुंचना शुरू हो गया है।
निगरानी समिति ऐसे किसानों और कोचियों पर कड़ी कार्रवाई भी कर रही है। इसके बावजूद पंजीकृत कुछ किसान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे है। पड़ोसी राज्य ओडिशा व आसपास जिले गरियाबंद, कांकेर जिले का धान सीमावर्ती सोसाइटियों में खपाने की लगातार शिकायतें मिल रही है। प्रशासन ने यहां सोसाइटियों में चौकसी बढ़ाई है। खाद्य निरीक्षक नरेश पीपरे ने बताया कि निगरानी के लिए जिला और ब्लाक स्तर पर निगरानी समिति गठित है। यह समिति लगातार कार्रवाई कर रही है। अब तक 750 क्विंटल से ज्यादा अवैध धान पकड़ा जा चुका है।
सर्वाधिक खरीदी करने वाले टॉप-5 शाखा
शाखा- किसान- धान- राशि
धमतरी- 1915- 83367- 19.29 करोड़
नगरी- 1776- 79872- 18.43 करोड़
मगरलोड- 1631- 67967- 15.67 करोड़
कुरूद- 1129- 48532- 11.19 करोड़
कोर्रा- 1005- 48268- 11.12 करोड़