कोरिया

कई बोर कम खुदाई के कारण हुए सूखे
27-Feb-2021 5:30 PM 36
कई बोर कम खुदाई के कारण हुए सूखे

ग्रामीणों के विरोध के बाद भी निजी जमीन पर नलकूप

कम खुदाई की होगी जांच-एसडीओ

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बैकुंठपुर, 27 फरवरी।
कोरिया जिले में एक बार फिर नलकूप खनन में अनियमितता की शिकायतें सामने आ रही है।  कम खुदाई के कारण पानी नहीं आने से ग्रामीणों मेंं काफी नाराजगी देखी जा रही है।
इस संबंध में ईएंडएम के एसडीओ आरएस तिवारी का कहना है कि अभी प्रारंभिक स्तर पर कार्य है, यदि कम खुदाई हो रही है तो जांच होगी, ग्रामीणों के बेहतर पेयजल मिले इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा।

संसदीय सचिव अंबिका सिंहदेव ने बैकुंठपुर विधानसभा क्षेत्र में 40 नलकूप खनन का कार्य अपने विधायक निधि से स्वीकृति दिलाई। इसके लिए प्रभावित ग्रामीणों के घरों के आसपास स्थान का चयन कर सूची बनाई गई, जिसके बाद उसकी स्वीकृति भी मिल गई। उनकी सकारात्मक सोच है कि आने वाली गर्मी में ग्रामीणों को पेयलज से वंचित ना होना पड़े। 

बीते कई वर्षों से सांसद और विधायक निधि के तहत होने वाले नलकूप खनन का कार्य कर रहे ईएंडएम विभाग ने कोटेशन के आधार पर मरवाही की फर्म को काम दे दिया। जबकि एक लाख से ज्यादा की राशि पर टेंडर करना था। 
जानकार सूत्र बताते हैं कि कुल 48 लाख के कार्य में अब तक 24 लाख का भुगतान भी हो गया है। जहां जहां नलकूप खनन हो रहा है,  मामले में काफी अनियमितता की शिकायतें लगातार सामने आ रही है। अब स्वीकृत हुई सूची में 14 नामों को बदला भी जा रहा है, जिसके लिए नए सिरे से नक्शा -खसरे की भी अधिकारियों ने मांग की है।

कम खुदाई के कारण हुए ड्राय
ईएंडएम विभाग के द्वारा कोटेशन पर काम जिस सप्लायर को काम दिया गया है बताया जा रहा है कि वो सत्ताधारी दल कांग्रेस के युवा नेता है। बैकुंठपुर विधानसभा के बचरापोड़ी क्षेत्र में कुल 12 नलकूप खनन होने है, जिसमें फटाफट 9 नलकूप खनन कर दिए गए, अब नलकूप खनन के नियमों में परिवर्तन हुआ, अब 350 फीट तक खुदाई करने का प्रावधान है, परन्तु ज्यादातर बोर 150 से 200 के अंदर खोद डाले जिसके कारण कई बोर एकदम ड्राय रह गए है। जब पानी नहीं निकला तो पूछा गया है कि पानी तो आया नहीं तो वहां के ग्रामीणों को बताया गया है कि जब हैंडपंप लगेगा तो पानी आ जाएगा।

निजी भूमि पर खोद डाले नलकूप
नलकूप का खनन सरकारी भ्ूामि पर किया जाना है, बावजूद इसके बचरापोड़ी क्षेत्र के कुछ स्थानों पर निजी भूमि पर नलकूप का खनन कर दिया गया। ग्रामीणों ने इसका विरोध भी किया, परन्तु किसी ने उनकी एक नहीं सुनी। जिसके बाद निजी भूमि पर ही नलकूप का खनन कर दिया गया।
 

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