बेमेतरा

पेट्रोल-डीजल के लिए लंबी कतारें 50 लीटर वाले केन में भी भरवा रहे
26-Mar-2026 3:01 PM
पेट्रोल-डीजल के लिए लंबी कतारें  50 लीटर वाले केन में भी भरवा रहे

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बेमेतरा, 26 मार्च। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध का असर अब जिले की सडक़ों पर भी दिखाई देने लगा है। बेमेतरा जिले में पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता को लेकर असामान्य मांग की स्थिति सामने आई है। स्थानीय स्तर पर ईंधन की बढ़ती खरीद के कारण कई पेट्रोल पंपों पर दबाव बढऩे की जानकारी मिल रही है।

हालत यह है कि जो लोग सामान्य दिनों में अपनी दैनिक आवश्यकता के अनुसार 100 या 200 का ईंधन भरवाते थे, वे अब भविष्य की असुरक्षा के डर से 500 से 1500 तक का पेट्रोल डलवा रहे हैं। घबराहट का आलम है कि लोग अपनी गाडिय़ों की टंकियां फुल करने के साथ-साथ घरों में सुरक्षित रखने के लिए 20 से 50 लीटर के प्लास्टिक केन लेकर पंपों पर पहुंच रहे हैं, जिससे संकट और गहरा मचा है।

स्थानीय लोगों और पंप संचालकों के अनुसार, हाल के दिनों में वैश्विक परिस्थितियों और ईंधन की कीमतों को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बाद उपभोक्ताओं द्वारा सामान्य से अधिक मात्रा में पेट्रोल-डीजल खरीदा जा रहा है। कई उपभोक्ता अपनी आवश्यकता से अधिक ईंधन भरवा रहे हैं, वहीं कुछ लोग अतिरिक्त भंडारण के लिए केन का भी उपयोग कर रहे हैं।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जिले में पेट्रोल की औसत दैनिक खपत लगभग 1.10 लाख लीटर बताई जाती है, जो बढक़र करीब 1.40 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंचने का अनुमान है। जिले में संचालित पेट्रोल पंपों पर इस बढ़ी हुई मांग का असर देखा जा रहा है।

शहर के कुछ पेट्रोल पंपों पर सीमित उपलब्धता के कारण उपभोक्ताओं की कतारें देखी गईं। कुछ स्थानों पर डीजल उपलब्ध नहीं होने और केवल पेट्रोल मिलने की जानकारी भी सामने आई है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पंप कर्मचारियों को व्यवस्था बनानी पड़ी और कुछ स्थानों पर पुलिस की सहायता ली गई।

सूत्रों के अनुसार, आपूर्ति से जुड़े व्यावसायिक कारणों, जैसे डीलरों से भुगतान की शर्तों, का भी असर सप्लाई पर पड़ सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि संबंधित कंपनियों की ओर से नहीं की गई है।

जिला खाद्य अधिकारी ओमकार ठाकुर ने कहा है कि पेट्रोल पंपों की निगरानी उनके विभाग के दायरे में नहीं आती। वहीं उपभोक्ताओं ने बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति के कारण असुविधा होने की बात कही है।

कतार में खड़े उपभोक्ताओं जैसे मोहन वर्मा, बैसाखु यादव, राजकुमार ने वर्तमान व्यवस्था पर कड़े प्रहार किए हैं। उनका कहना है कि जिम्मेदारों के उदासीनता के कारण आम आदमी को हर बुनियादी चीज के लिए कतारों में लगाना पड़ रहा है। पहले डीएपी खाद के संकट ने किसानों को रुलाया, अब पेट्रोल-डीजल की मारामारी में आम जनता का जीना दूभर कर दिया है।

शहर के कुछ पंपों पर सीमित समय के लिए ईंधन उपलब्ध नहीं होने की स्थिति भी बताई गई, जिसके चलते उपभोक्ताओं को इंतजार करना पड़ा। प्रशासन या तेल कंपनियों की ओर से आपूर्ति की स्थिति और आगे की योजना को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।


अन्य पोस्ट