बेमेतरा

दिव्यांग बेटे को साइकिल पर बिठाकर 3 साल से सरकारी सिस्टम का चक्कर काट रहा बुजुर्ग पिता
06-Apr-2023 3:01 PM
दिव्यांग बेटे को साइकिल पर बिठाकर 3 साल से सरकारी सिस्टम का चक्कर काट रहा बुजुर्ग पिता

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बेमेतरा, 6 अप्रैल।
तपती दुपहरी में एक बुजुर्ग साइकिल के कैरियर पर दिव्यांग युवा को बिठाए कलेक्टोरेट पहुंचता है। उसका दर्द सुन मन पसीज गया। उसने बताया तीन साल से वह दोनों पैर से विकलांग अपने बेटे को बैटरी चलित साइकिल दिलाने सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहा है। हर बार उससे अलग दस्तावेज की मांग की जाती है और वह लौट जाता है। अनपढ़ गरीब और बेबस पिता ने यह भी कहा कि कागज (प्रमाणपत्र) का क्या साहब, मैं तो दोनों पैरों सेे दिव्यांग अपने बेटे को ही लेकर हमेशा आता हूं।

दोनों पैर से दिव्यांग परमेश्वर पर है तीन बच्चों की जिम्मेदारी
जिला मुख्यालय से 8 किमी दूर ग्राम चोरभ_ी से साइकिल से बेटे के पीछे बिठाकर शहर पहुंचा था 65 साल का कुंवर नंवरंगे। जिला कार्यालय पहुंचने के बाद दो घंटे तक रूका पर काम नहीं हुआ था। उसका 35 साल का बेटा परमेश्वर दोनों पैरों से दिव्यांग है।

परमेश्वर की मां आई, इसलिए पैदल ही पहुंचे
बुजुर्ग ने बताया कि वो बीते 3 साल से जिला कार्यालय व विभिन्न जनसमस्या निवारण शिविर में जाकर आवेदन दे चुका है। बीते तीन दिन में ही दो बार आया है। सोमवार को आवेदन देने आया था जिसके बाद दिव्यांग पत्र मांगे जाने पर लौटना पड़ा। एक दिन बीत जाने के बाद बुधवार को आया हूं। बेेटे को साइकिल पर बैठाकर चलाना मुश्किल होता है। इसलिए पैदल ही आया हूं। आज परमेश्वर की मां सुमरित बाई (60) साथ में पैदल चलते हुए आई है। पैरों से चल पाने में असहाय दिव्यांग पुत्र की चिंता कर पिता सरकारी योजना का लाभ दिलाने के लिए 65 साल की आयु में अपने बेटे को साइकिल पर बैठाकर जिला कार्यालय में ग्राम कुंवर नवरंगे अपने 50 प्रतिशत दिव्यांग बेटे परमेश्वर सतनामी (35)को बैटरी चलित तीन पहिया साइकिल दिलाने के लिए 3 साल से चक्कर लगा रहा है।

पुराना प्रमाण पत्र होने पर लौटा
दिव्यांग हितग्राही परमेश्वर ने बताया कि दोनों पैर से चल पाने में असमर्थ है हालत ऐसी है कि कुर्सी में बैठ जाने पर हाथ का सहारा देने पर उठ पाता है, और सहारा के साथ ही कुछ चल पाता है। हाथ ठीक है जिसकी वजह से अगर बैटरी चलित साइकिल उसे मिले तो आत्मनिर्भर होकर आज जा सकता है। कुछ काम कर कुछ कमाई कर जीवन गुजार कर सकता है।

वो शादीशुदा व 3 बच्चों का पिता है। परमेश्वर ने बताया कि उसका दिव्यांग प्रमाणपत्र सात साल पुराना है जिसे अब नया बनवाने कहा गया है। उम्र बढऩे के साथ ही विकंलागता बढ़ती जा रही है।

प्रमाण पत्र क्या साहब, मैं तो बेटे को ही ले आया हूं
आवेदन व फरियाद के साथ अपने बेटे की हालत व स्थिति दिखाने के लिए बेटे को लेकर जिला कार्यालय पहुंचने के बाद दस्तावेज की कमी बता कर अधिकारियों व कर्मचारियों ने बगैर उनके पक्ष को सुने वापस लौटा दिया। स्थिती को लेकर बुजुर्ग कुंवर नवरंगे ने बताया कि कम पढ़े लिखे होने के कारण हम लोग आवेदन तक नहीं बना सकते हैं जिसका फायदा उठाते हुए बेटे के लिए बैटरी चलित साइकिल मांगने पर कार्यालय में मौजूद कर्मचारी तरह तरह के कागज व दस्तावेजों की मांग कर लौटा देते हैं। कागज मंगाए जाने के नाम पर कई बार अपने बेटे को लेकर जिला कार्यालय पहुंच चुका हूं, पर आज तक साइकिल मिलना तो दूर मिलने का भरोसा तक नहीं देते जिम्मेदार।

80 फीसदी दिव्यांग को देने का प्रावधान
उप संचालक समाज कल्याण बरखा कासु ने बताया कि दिव्यांग जन को उपकरण, साइकिल व बैटरी चलित साइकिल प्रदान करने के लिए मापदंड निर्धारित है। हितग्राही के 80 फीसदी दिव्यांग होने पर ही बैटरी चलित साइकिल दे सकते हैं। अगर 50 फीसदी दिव्यांग हो तो हाथ से चलने वाला साइकिल दिया जा सकता है। फिलहाल आवेदन की जानकारी उनके पास नहीं है।
 


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