बेमेतरा

मोदी सरकार गरीबों की रोजी-रोटी छिनने का काम कर रही - अनिला
11-Jan-2026 3:19 PM
मोदी सरकार गरीबों की रोजी-रोटी छिनने का काम कर रही - अनिला

कहा- मनरेगा में बदलाव काम के संवैधानिक अधिकार पर हमला

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बेमेतरा, 11 जनवरी। पूर्व मंत्री एवं विधायक अनिला भेडिय़ा ने मनरेगा बचाव अभियान के तहत पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि मारेगा के कानूनी बदलाव के कारण काम के संवैधानिक अधिकार पर हमला किया गया है। उन्होंने कहा कि काम करने का अधिकार छिना जा रहा है। मनरेगा के तहत देश भर के प्रत्येक ग्रामीण परिसर को कम की गारंटी प्राप्त थी।

देश की किसी भी ग्राम पंचायत में किसी भी प्रकार के काम मांगने पर 15 दिन के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य था। नई योजना सरकार की मर्जी से बनती जाने वाली एक रेवाड़ी बन कर रह जाएगी। इस अवसर पर

पूर्व विधायक आशीष ठाकुर (बिलासपुर), जिला महिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कविता साहू, जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष प्रांजल तिवारी, जिला पंचायत सदस्य शशि प्रभाग गायकवाड, हरीश साहू, टीआर जनार्दन, सनतधर  दिवान, मनोज शर्मा, ललित विश्वकर्मा आदि उपस्थित थे।

नई योजना में राज्य सरकारों पर डाला आर्थिक बोझ

ग्राम पंचायत अपना अधिकार खो देगी और केवल मोदी सरकार के आदेशों को लागू करने वाली एजेंसी बनकर रह जाएगी। ठेकेदारों को लाया जाएगा और मजदूरों को ठेकेदारों की परियोजनाओं के लिए लेबर सप्लाई में बदल दिया जाएगा। इस स्थानीय कार्यों के लिए मनरेगा मेट्स नहीं होंगे। मनरेगा के तहत आपकी मजदूरी का 100 फीसदी भुगतान केंद्र सरकारे करते थे। इसलिए राज्य सरकार ने बिना किसी कठिनाई के काम उपलब्ध करा पाती थी। अब राज्य सरकारों को इसकी मजदूरी का 40 फीसदी हिस्सा स्वयं वहन करना होगा। खर्च बढ़ाने के लिए संभव है कि वह काम बिल्कुल भी ना दे।

बेहतर मजदूरी की मांग होगी कमजोर

न्यूनतम मजदूरी की कोई गारंटी होगी और नहीं हर साल बढ़ोतरी का कोई गारंटी। फसल कटाई के मौसम में काम की अनुमति नहीं होगी, जिससे मजदूरों की अन्य काम देने वालों से बेहतर मजदूरी की मांग करने की ताकत कमजोर होगी और उन्हें बिना न्यूनतम मजदूरी के जो भी काम मिलेगा उसे स्वीकार करने को मजबूर किया जाएगा। मनरेगा के तहत ग्राम पंचायत को अपने गांव के विकास के लिए विभिन्न कार्यों में मजदूरों को नियमित करने का अधिकार था। विकास कार्यों की योजना और सिफारिश ग्राम पंचायत और ग्राम सभाओं द्वारा की जाती थी।

मजदूरी मनमाने ढंग से तय की जाएगी

मोदी सरकार चूनेगी की कौन से ग्राम पंचायतो को काम मिलेगा और किसे नहीं। मनरेगा के तहत काम तय न्यूनतम मजदूरी पर दिया जाता था, जिसमें हर साल बढ़ोतरी की जाती थी। साल के 365 दिन काम उपलब्ध रहता था, ताकि जरूरत पडऩे पर परिवारों के पास कमाई का विकल्प हमेशा मौजूद रहे। अब मोदी सरकार के इन बदलावो के तहत मजदूरी मनमाने ढंग से तय की जाएगी।

 

 


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