बलौदा बाजार

पुलिसकर्मियों को फिंगरप्रिंट व एनएएफआईएस प्रणाली का प्रशिक्षण
13-Jun-2026 7:12 PM
पुलिसकर्मियों को फिंगरप्रिंट व एनएएफआईएस प्रणाली का प्रशिक्षण

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बलौदाबाजार, 13 जून। जिला पुलिस कार्यालय में आयोजित एक दिवसीय फिंगरप्रिंट प्रशिक्षण कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को फॉरेंसिक जांच से संबंधित तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। पुलिस मुख्यालय रायपुर के निर्देश पर आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य अपराध विवेचना में वैज्ञानिक साक्ष्यों के उपयोग को बढ़ावा देना बताया गया। कार्यशाला में जिले के विभिन्न थाना और चौकियों से चयनित लगभग 50 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए।

प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को घटनास्थल से प्राप्त फिंगरप्रिंट के संरक्षण, संग्रहण और दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि कई मामलों में फिंगरप्रिंट जांच के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में उपयोग किए जाते हैं।

कार्यशाला में पुलिसकर्मियों को यह भी बताया गया कि घटनास्थल पर मिलने वाले चांस प्रिंट (आंशिक या अदृश्य फिंगरप्रिंट) को किस प्रकार सुरक्षित रखा जाए ताकि उनका उपयोग जांच और न्यायिक प्रक्रिया में किया जा सके।

कार्यशाला का एक प्रमुख विषय राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (एनएएफआईएस) रहा। अधिकारियों ने बताया कि इस प्रणाली में अपराधियों के फिंगरप्रिंट का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाता है। घटनास्थल से प्राप्त फिंगरप्रिंट का इस डेटाबेस से मिलान कर संभावित पहचान की जा सकती है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इससे विभिन्न राज्यों में दर्ज रिकॉर्ड के आधार पर संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करने में सहायता मिल सकती है।

कार्यशाला में रेंज फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट एवं उप पुलिस अधीक्षक राकेश नरवरे ने प्रशिक्षण दिया। उन्होंने कहा कि घटनास्थल पर पहुंचने के बाद साक्ष्यों को सुरक्षित रखना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

नरवरे ने कहा, च्च्कई बार जल्दबाजी या लापरवाही के कारण महत्वपूर्ण फिंगरप्रिंट नष्ट हो जाते हैं, जिससे जांच प्रभावित हो सकती है। प्रशिक्षण में पुलिस कर्मचारियों को विभिन्न सतहों से फिंगरप्रिंट लेने, उन्हें संरक्षित रखने और वैज्ञानिक तरीके से दस्तावेजीकृत करने की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।ज्ज्

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फॉरेंसिक तकनीकों और डिजिटल प्रणालियों के उपयोग से अपराध जांच को अधिक वैज्ञानिक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से पुलिसकर्मियों को आधुनिक जांच पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।


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