बलौदा बाजार
बारनवापारा के वनांचल में बिजली और सडक़ का इंतजार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 11 जून। कसडोल कोरदा आजादी के 79 साल बाद भी अंधेरे में 21 गांव बारनवापारा के वनांचल में बिजली और सडक़ का इंतजार हैं। आज देश डिजिटल इंडिया की ओर तेजी से बढ़ रहा हैं। गांव गांव तक विकास पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के सोनाखान ब्लॉक अंतर्गत बारनवापारा वनांचल क्षेत्र के 21 गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। यहां न बिजली है, न पक्की सडक़ हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी वे विकास की मुख्य धारा से नहीं जुड़ पाए हैं।
बारनवापारा के घने जंगलों के बीच बसे 21 गांव में सूरज ढलते ही अंधेरा छा जाता हैं। बिजली नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती हैं। मोबाइल चार्ज करने से लेकर रोजमर्रा के काम तक ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई बने हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल क्षेत्र होने के कारण रात में जंगली जानवरों और जहरीले जीवों का खतरा बना रहता हैं। अंधेरे की वजह से कई बार हादसे से और जनहानि की दुर्घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।
सिर्फ बिजली ही नहीं सडक़ की समस्या भी ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई हैं। बारिश के मौसम में कच्चे रास्ते दलदल में तब्दील हो जाते हैं और गांव का संपर्क मुख्य मार्ग से कट जाता हैं।
स्थिति इतनी गंभीर है कि किसी मरीज या गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को आज भी खाट या डोली का सहारा लेना पड़ता हैं। कई किलोमीटर पैदल चलकर मरीजों को मुख्य सडक़ तक पहुंचाया जाता हैं।
ग्रामीणों ने शासन प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्दी-जल्दी ही बिजली और सडक़ निर्माण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र की जनता आंदोलन, धरना प्रदर्शन और चक्का जाम जैसे लोकतांत्रिक आंदोलन करने के लिए मजबूर होगी। ग्रामीणों का कहना है कि शहीद वीर नारायण सिंह की धरती पर बसे इन गांवों को अब और उपेक्षित नहीं रखा जाना चाहिए।
शादियों के लिए रिश्ते नहीं आ रहे
वहीं ग्रामीणों का कहना है कि बेटियां अब बड़ी हो चुकी हैं। शादी के रिश्ते के लिए रिश्ते नहीं आ रहे हैं। इस गांव में बेटे बेटियों की शादी का काफी दिक्कतें आ रहे हैं।
धरमलाल रात्रे अध्यक्ष ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बारनवापारा का कहना है कि 21 ग्रामों में बिजली और सडक़ नहीं होने से बढ़ाने वाले बच्चों को लालटेन मिट्टी के दिए से पढ़ाई करनी पड़ती हैं। वहीं सडक़ नहीं होने से बीमारी को अस्पताल तक ले जाने के लिए खाट या डोली का सहारा लेना पड़ता हैं। बिजली एवं पक्की सडक़ नहीं होने से शादी के उम्र के लडक़े लड़कियों को वर वधु नहीं मिल पा रहे पा रहे हैं।


