बलौदा बाजार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
भाटापारा, 2 सितंबर। श्री आदिनाथ नवग्रह पंच बाल्याती दिगंबर जैन मंदिर में पर्यूषण पर्व का चौथा दिवस धूमधाम से मनाया गया। सर्वप्रथम श्री पुष्पदंत नाथ भगवान की प्रतिमा मस्तक पर विराजमान कर आर्नव मोदी ने पाण्डुक शिला में विराजमान की, उसके बाद मंगल अभिषेक प्रारंभ हुआ। आज की शांति धारा का सौभाग्य राहुल रियान जैन राजनांदगांव परिवार एवं आर्नव मोदी परिवार को प्राप्त हुआ।
शांति धारा के पश्चात भगवान की मंगल आरती की गई। आरती के पश्चात श्री जी की प्रतिमा बेदी पर विराजमान की गई और पर्यूषण पर्व की पूजा प्रारंभ हुई। सर्वप्रथम देव शास्त्र गुरु की पूजा, भगवान आदिनाथ की पूजा, श्री 1008 पुष्पदंत नाथ भगवान की पूजा,24 तीर्थंकर का अर्घ , सोलह कारण पूजा , पंचमेरू पूजा,दशलक्षण पूजा, स्वयंभू स्तोत्र, संगीत के साथ भक्ति के साथ संपन्न की गई।
आज की धर्म सभा को संबोधित करते हुए सुमन लता मोदी ने बताया- धर्म का तीसरा लक्षण उत्तम शौच धर्म है। शौच धर्म का अर्थ स्वच्छता, निर्मलता, उज्जवलता है। जिस प्रकार क्षमा धर्म का विरोधी क्रोध है , मार्दव धर्म का विरोधी मान है , आर्जव धर्म का विरोधी माया है। इसी प्रकार इस शौच धर्म का विरोधी लोभ है, लोभ समस्त पापों का जन्मदाता है धन का लोभ,यश का लोभ ,परिग्रह संचय का लोभ पद का लोभ आदि जो समस्त प्रकार के लोभ से दूर रहता है ,वह पवित्र हृदय वाला व्यक्ति माना जाता है। जिसका मन पवित्र हो गया। उसका जीवन भी पवित्र हो जाएगा। और जिसका मन अपवित्र हो गया, उसका जीवन भी अपवित्र हो जाएगा।
संसार का हर प्राणी सुख चाहता है, पर सच्चा निराकुल सुख किसे कहते हैं, वह जानता नहीं है ,और मन की इच्छाओं को पूरा करके सुखी होने का प्रयास करता है । व्यक्ति अपनी इच्छाओं को जितना जितना पूरी करता है वह उतनी ,उतनी और बढ़ती चली जाती है, लोग की यह तासीर है कि जितना लाभ बढ़ता जाता है उतना लोभ भी बढ़ता चला जाता है। लोभ के कारण ही संसार के सभी प्राणी दुखी है।
सुमन लता मोदी ने आगे बताया -बंधन और मुक्ति दोनों का मूल कारण मन है। आचार्य कहते हैं तुम यदि सुखी रहना चाहते हो तो अपनी इच्छाओं को कम करो,और हर हाल में संतुष्ट रहने का प्रयास करो।
सभी लोग धन संग्रह से ही धन्य हो रहे हैं। हम लोभ के कारण अपने स्वर्णिम मानव जीवन को गंवा रहे हैं। जिस आत्मा में परमात्मा बनने की शक्ति है, पतित से पावन बनने की क्षमता है ,वही आत्मा लोभ लिप्स के कारण संसार में रूल रहा है।
संसार में सभी व्यक्ति दुखी हैं, वे सदा सुख की तलाश करते हैं। जन्म से लेकर मृत्यु तक व्यक्ति सुख की तलाश करता है। दुनिया में सुख के लिए भाग दौड़, प्रतिस्पर्धा ,पढऩा, स्कूल जाना, मेहनत करना ,मजदूरी करना, फैक्ट्री लगाना, आदि कार्य करता है और सोचता है खूब धन कमा लूं ,सुखी हो जाऊंगा ,बहुत सी जमीन जायदाद खरीदता है ,मैं सुखी हो जाऊंगा । पर ध्यान रखना निराकूलता के बिना सच्चा कारण सुख नहीं हो सकता। जिसके मन में अधिक अधिक पाने की चाह होती है ,उस व्यक्ति का जीवन कांटों से भरा होता है। उसे कभी सुख नहीं मिल सकता। सुख पाने के लिए संतोष बहुत जरूरी है। जो संतोषी है वह हमेशा सुखी है ,और जो असंतोषी है वह हमेशा दुखी है।लोभी व्यक्ति का मन कभी शांत नहीं रहता।
आज श्री 1008 पुष्पदंत नाथ भगवान का निर्वाण कल्याणक का पावन दिवस है,आज सभी भक्तों ने मिलकर निर्वाण कांड पढक़र निर्वाण लाडू अर्पित किया। अंत में अविरल मोदी के द्वारा जिनवाणी स्तुति संपन्न की गई। रात्रि कालीन भगवान आचार्य श्री महाराज जी की मंगल आरती संपन्न की गई।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से नवीन, नितिन,सचिन ,पंकज गदिया, प्रकाश, आलोक, विनोद, अभिषेक, अभिनव ,अभिनंदन , अरिंजय ,अविरल, मोदी, सुमन लता ,रजनी ,नेहा, सुरभि मोदी ,अभिलाषा जैन, आदि प्रमुख रूप से उपस्थितथे।


