बलौदा बाजार

पर्युषण पर्व का पहला दिन धूमधाम से मना
29-Aug-2025 4:02 PM
पर्युषण पर्व का पहला दिन धूमधाम से मना

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

भाटापारा, 29 अगस्त। श्री आदिनाथ नवग्रह पंच बाल्याती दिगंबर जैन मंदिर में पर्युषण पर्व का पहला दिवस धूमधाम से मनाया गया। उत्तम क्षमा धर्म है सर्वप्रथम श्री महावीर भगवान की प्रतिमा मस्तक पर विराजमान कर प्रकाश मोदी ने पाण्डुक शिला में विराजमान की, उसके बाद मंगल अभिषेक प्रारंभ हुआ।

 आज की शांति धारा का सौभाग्य प्रकाश चंद मोदी परिवार एवं अक्षत जैन रवि जैन परिवार को प्राप्त हुआ। शांति धारा के पश्चात भगवान की मंगल आरती की गई।  इंद्र ने हर्ष कियो भारी ,जन्मोत्सव श्री वर्धमान की किनी तैयारी की धुन पर सभी ने भक्ति भाव से नृत्य करते हुए भगवान की मंगल आरती संपन्न की। आरती के पश्चात श्री जी की प्रतिमा बेदी पर विराजमान की गई और पर्यूषण पर्व की पूजा प्रारंभ हुई ।सर्वप्रथम देव शास्त्र गुरु की पूजा, भगवान आदिनाथ की पूजा, 24 तीर्थंकर का अर्घ, सोलह कारण पूजा, दशलक्षण पूजा संगीत के साथ भक्ति के साथ संपन्न की गई। धर्म सभा को संबोधित करते हुए श्री अभिषेक जी ने कहा धर्म का पहला लक्षण उत्तम क्षमा है। आत्मा की स्वाभाविक परिणीति का नाम क्षमा है। अपनी आत्मा के स्वभाव में स्थिर हो जाने का नाम क्षमा है। व्यवहार में क्रोध के अभाव को क्षमा कहते हैं। जिस प्रकार बिना आत्मा के इस मानव देह का कोई मूल्य नहीं, इसी प्रकार क्षमा के बिना आत्मा का भी कोई मूल्य नहीं। क्षमा वीरस्य भूषणम,क्षमा धर्म वीरों का आभूषण है। जिसने क्रोध पर विजय प्राप्त कर ली वही वास्तव में वीर है। अभिषेक जी ने आगे बतलाया जितना अनर्थ शेर, सर्प, अग्नि, शत्रु, जहर हमारा नहीं करते, उससे कई गुना ज्यादा अनर्थ क्रोध करता है।  संसार में क्रोध के समान कोई पाप नहीं है। क्रोध के समान कोई शत्रु नहीं है। तथा संसार में जितने अनर्थ होते हैं वह सब क्रोध के कारण होते हैं। हमें ऐसे क्रोध को छोड़ देना चाहिए ,यदि शांति चाहिए तो क्रोध के अवसर पर गम खाने में ही फायदा है । किसी विद्वान ने कहा कि कम खाना, गम खाना, ना हकीम पर जाना, ना हकीम पर जाना। कम खाओगे तो बीमार नहीं पड़ोगे, और गम खाओगे तो लड़ाई झगड़ा नहीं होंगे। वकील के चक्कर नहीं काटना पड़ेंगे। क्रोध आत्मा की एक ऐसी विकृति है कमजोरी है जिसके कारण व्यक्ति का विवेक समाप्त हो जाता है। क्रोध जाति पाती को नहीं देखता, छोटे बड़ों को नहीं देखता ,अमीर गरीब को नहीं देखता ,ज्ञानी मूर्ख को नहीं देखता ,क्रोध सबको आता है, क्रोध पक्षपात नहीं करता की गई।  रात्रि कालीन भगवान आचार्य श्री महाराज जी की मंगल आरती संपन्न की गई। कार्यक्रम में प्रमुख रूप विनोद, अभिषेक, अभिनव, अभिनंदन, अरिंजय,अविरल, अर्णव मोदी, सुमन लता, रजनी,नेहा, सुरभि मोदी, अभिलाषा, सनाया, रियान जैन, अंकुश अनुराग जैन, मयंक संतोष जैन आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।


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