बलौदा बाजार
जल संचयन अभियान में कुआं की सफाई के लिए भी हो पहल
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 3 मई। नगर में आज भी दर्जनों कुआं देखरेख व सफाई के अभाव में सुख या पट चुके हैं। यदि इनकी सफाई का कार्य योजनाबध्द तरीके से कराया जाए तो निश्चित ही यह जल संचयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
जिले के विभिन्न ग्रामों में जल स्रोतों के संरक्षण और जल संचयन हेतु नागरिकों को जागरूक करने के उद्देश्य से सघन अभियान चलाया जा रहा हैं। जिसके तहत तालाबों नालों की सफाई ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंप के समीप सोखता गडढा का निर्माण आदि कार्य किया जा रहा हैं। यदि जल के प्रमुख स्रोत इन कुओं की सफाई भी इस अभियान का हिस्सा बन जाए तो निश्चित ही अपने अस्तित्व के समाप्ति के कगार पर खड़े इन जल स्रोतों को भी नया जीवन मिल पाना संभव हो पाएगा। नगर में आज भी दर्जनों कुआं देखरेख व सफाई के अभाव में सुख या पट चुके हैं। यदि इनकी सफाई का कार्य योजनाबध्द तरीके से कराया जाए तो निश्चित ही यह जल संचयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
गौरतलब है कि गरीब 25-30 वर्ष पूर्व नगर तथा ग्रामीण अंचल में कुआं पर जल का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत हुआ करते थे। बाद में आधुनिकता की ओर बढऩे घर-घर हैंडपंप व सार्वजनिक नलों के लगने के साथ ही कुओं की उपयोगिता कम होती चली गई। कुछ गैर जिम्मेदार लोगों ने इसमें घर की गंदगी फेंकना प्रारंभ कर दिया। जिससे धीरे-धीरे कचरों से पटते चले गये। प्रशासन भी कुओं की सफाई के प्रति उदासीन बना रहा।
जिला मुख्यालय में ही पुराने बस स्टैंड, बेसिक शाला, पशु चिकित्सालय, सिंधी कॉलोनी, पुराना बिजली ऑफिस, शासकीय हाई स्कूल, 29 क्वार्टर, पुरानी बस्ती, जनपद पंचायत कार्यालय, पुरानी कृषि उपज मंडी जैसे दर्जनों स्थानों पर बारहमासी पेयजल के स्रोत प्राचीन कुआं थे। कालांतर में उपेक्षा के चलते कुछ स्थानों पर कुओं को पाटकर उसमें कॉलोनी का निर्माण कर दिया गया। शेष बचे हुए कुओं में गंदगी व कचरा डालकर पाट दिया गया जिसके चलते अब इन कुओं का अस्तित्व लगभग समाप्ति के कगार पर पहुंच चुका हैं। यदि जिला प्रशासन एवं सामाजिक कल्याण व उत्तरदायित्व के कार्य का ढिंढोरा पीटने वाले कथित एनजीओ योजनाबध्द तरीके से इन कुओं की सफाई हेतु आमजनों को जोडक़र अभियान चलाये तो निश्चित ही कुओं को नया जीवन दान मिल सकेगा। साथ ही बारिश के दौरान भूजल स्रोत के रिचार्ज एवं वर्षा जल संचयन की दिशा में ही यह महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
ऐतिहासिक महत्व का है पुराने मंडी स्थित कुआं
नगर के पुराने कृषि उपज मंडी परिसर स्थित कुआं का ऐतिहासिक महत्व हैं। वर्ष 1935 में महात्मा गांधी मंडी परिसर में आयोजित एक सभा में शामिल हुए थे। जहां उन्होंने दलित उधर का संदेश देने स्वयं दलित युवक के हाथों पानी निकलवा कर पिया था। यह कुआं वर्षों तक नगर की बड़ी जनसंख्या के लिए पेयजल का महत्वपूर्ण स्रोत था। बाद में स्कूल की ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए तत्कालीन मंडी सचिव योगेश अग्रवाल ने कुआं का जिला जीर्णोद्धार कराया था। जिसकी जानकारी लगते ही पूर्व एडीजी पुलिस आर के विज इस कुआं को देखने पहुंचे थे। वहीं ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए तत्कालीन कलेक्टर रजत बंसल, डोमन सिंह आदि ने भी इस स्थल को विकसित करने की योजना बनाया था परंतु उनके स्थानांतरण के पश्चात योजना ठंडे बस्ते में चली गई। गांधीवादियों में इस ऐतिहासिक व प्राचीन धरोहर कुआ का जीनोद्वार कर सुरक्षित करने की मांग प्रशासन से किया हैं।


