बलौदा बाजार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 20 अप्रैल। वैसे तो इस साल क्षेत्र के प्राय: हर गांव में पानी की समस्या से कोहरा मचा हुआ हैं। लेकिन यहां से लगभग 10 किलोमीटर दूर 4000 की आबादी वाला ग्राम मटिया खासकर गर्मी के दिनों में पिछले पांच दशकों से निस्तारी एवं पेयजल की विकराल समस्या से जूझ रहा हैं।
ऐसा नहीं कि वहां पर निस्तारी एवं पेयजल की साधन का प्रयास नहीं किया गया है परंतु किए गए सभी प्रयास वैकल्पिक और असफल रहे हैं क्योंकि कुछ दिनों बाद समस्या फिर से जस की तस हो जाती हैं।
ग्रामीणों के अनुसार गांव से महज 1 किलोमीटर दूर कभी जीवन दायिनी रही जमुनईया नाला गुजरा है, वहां पर 20 एकड़ का एक और पांच पांच एकड़ के दो तालाब हैं। शासकीय और निजी रूप से कराए गए बोर खनन से पूरा गांव बिछ चुका है परंतु पानी नहीं होने से मार्च में कभी ट्यूबवेल कुए सभी तालाब और जमुनईया नाल भी सूख जाते हैं। जो इस साल एक माह पहले फरवरी में ही सूख गए हैं। जिसके कारण इसी साल अब तक 500 फीट गहरे निजी और सरकारी 7 से 8 बोर खनन किए गए परंतु पानी नहीं निकल पाया।
55 साल के परदेसी साहू, पंचायत के सरपंच पति अनीता टीकाराम निषाद, रामेश्वर यादव, हितेंद्र यादव ,ईश्वर साहू आदि लोगों ने गांव से 1.5 किलोमीटर दूर एक से 1.5 इंच पानी डिस्चार्ज कर रहे एकमात्र ट्यूबवेल को पूरे गांव के लिए आधार बनते हुए कहा कि बच्चे, बूढ़े, जवान, महिला पुरुष सहित पूरा गांव यही से साइकिल मोटरसाइकिल बैलगाड़ी छोटा हाथी ई रिक्शा आदि साधनों से पानी भरते हैं और आधी रात को भी लोग यहां पर पानी भरते मिलेंगे।
लोगों ने बताया कि पानी की समस्या हमारी नियति बन चुकी हैं। इसलिए गरीब अमीर छोटे बड़े सभी लोगों के घर में और कुछ रहे या ना रहे पानी ढोने वाला एक डब्बा प्राप्त मात्रा में जरूर मिलेगा। जिसमें पानी घर ले जाकर नहाने धोने निस्तारी भोजन,धोने, मवेशियों को पिलाने आदि सभी उपयोग में लाया जाता हैं।
बिजली गुल हो जाती है तो गांव में मच जाता है हाहाकार
लोगों ने बताया कि यदि 10 मिनट भी बिजली गुल हो जाती है तो गांव में हाहाकार मच जाता है और ट्यूबवेल के पास पानी भरने वाले बन का अंबार लग जाता हैं। और यदि लंबे समय तक पंप चालू नहीं हुआ तो कई गांव से पानी लाकर गुजारा करते हैं।
टैंकर से पानी पहुंचाने संबंधित सवाल पर सरपंच प्रतिनिधि ने बताया कि पंचायत में पैसा नहीं हैं। हम टैंकर कहां से चला सकते हैं। ग्रामीणों ने जल मिशन के तहत पाइपलाइन से लाने वाले नदियों का पानी अथवा प्रस्तावित कुम्हारी बांध के तुरमा गुर्रा तक विस्तार के अलावा कोई विकल्प नहीं हैं।


