बलौदा बाजार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 20 अप्रैल। सोमवार की सुबह 3 बजे 22 मिनट पर सूर्य ने अपनी उच्च राशि में प्रवेश किया जिससे खरमास की समाप्ति हो गई और एक बार फिर मांगलिक कार्यों का शुभारंभ हो गया।
सूर्य के इस राशि परिवर्तन से यहां धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व जुड़ा हैं। वही आम जनजीवन पर भी इसका व्यापक प्रभाव देखा जा रहा हैं। खरमास के चलते पिछले एक माह से विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य वर्जित हैं। लेकिन अब इन पर से रोक हट गई हैं। इससे शहर और गांव में एक बार फिर शहनाइयों की गूंज सुनाई देने लगी हैं।
खरमास की शुरुआत 14 मार्च को हुई थी जबकि इससे पहले 6 मार्च से हो होलस्टक लगने के कारण भी शुभ कार्यों का विराम लगा था। अब खरमास के समाप्त होते ही 10 जून तक विवाह के लिए शुभ मुहूर्त हैं। हालांकि 12 जून को गुरु के अस्त होने से फिर विवाह रुक जाएंगे। पंडित पृथ्वी पाल के अनुसार भड़ली नवमी तक यानी 4 जुलाई तक विवाह मुहूर्त रहेंगे लेकिन 10 जून के बाद तारा अस्त के कारण शुभ विवाह नहीं होंगे।
30 अप्रैल को अक्षय तृतीया का पर्व है जिसे अबूझ मुहूर्त कहा जाता है। इस दिन बिना पंचांग देख विवाह जैसे मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। यही कारण है कि इस दिन शादी के लिए अत्यधिक बुकिंग रहती हैं।
पंडित पृथ्वी पाल के अनुसार मांगलिक कार्यों का अगला शुभ काल 1 नवंबर से देवउठनी एकादशी से शुरू होगा। सूर्य के मेष राशि में गोचर से गर्मी में वृद्धि होगी वही शुक्र के गर्मी होने से वातावरण में सुभता और भी बढ़ेगी। जायसवाल टेंट हाउस के संचालक सोनू जायसवाल ने बताया कि अप्रैल में और जून के विवाह मुहूर्त पहले से ही फुल बुक है। खासकर 18 अप्रैल से 30 अप्रैल तक के 8 दिनों मे सबसे ज्यादा शादियों की बुकिंग हैं। डेस्टिनेशन वेडिंग का क्रेज भी इन दिनों लोगों में तेजी से बड़ा है।


